उत्तर प्रदेश में बालवाटिका को समग्र विकास केंद्र ब

बालवाटिका बनेगी बच्चों के समग्र विकास की पहली प्रयोगशाला, योगी सरकार ने पंचकोश मॉडल पर तैयार किया नया पाठ्यक्रम

लखनऊ: उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को नई दिशा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। बालवाटिका को अब केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास की “पहली प्रयोगशाला” के रूप में विकसित किया जा रहा है।

NEP 2020 के अनुरूप नया पाठ्यक्रम

राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत तैयार इस पाठ्यक्रम में भारतीय ज्ञान परंपरा के “पंचकोश सिद्धांत” को आधुनिक शिक्षा से जोड़ा गया है। इसका उद्देश्य बच्चों के समग्र विकास को सुनिश्चित करना है।

पंचकोश सिद्धांत पर आधारित विकास मॉडल

नए ढांचे में बाल विकास को पांच प्रमुख आयामों से जोड़ा गया है

  • अन्नमय कोष: शारीरिक विकास
  • प्राणमय कोष: सामाजिक और नैतिक विकास
  • मनोमय कोष: भाषा और साक्षरता
  • विज्ञानमय कोष: संज्ञानात्मक विकास
  • आनंदमय कोष: सौंदर्यबोध और रचनात्मक विकास

 खेल और गतिविधि आधारित शिक्षण पर जोर

एससीईआरटी द्वारा “चहक”, “कदम” और “कलांकुर” जैसी पुस्तकें और गतिविधि आधारित सामग्री विकसित की गई है। इनमें चित्रकथा, संख्या ज्ञान, कला और संगीत आधारित शिक्षण शामिल किया गया है। इससे बच्चों को खेल-खेल में सीखने का अवसर मिलेगा और उनकी समझने की क्षमता बेहतर होगी।

समग्र विकास पर सरकार का फोकस

सरकार का उद्देश्य बच्चों को बचपन से ही आत्मविश्वासी, संवेदनशील और सृजनशील नागरिक के रूप में तैयार करना है। इसके लिए भाषा, सामाजिक व्यवहार और रचनात्मक कौशल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।