उज्जैन के बड़नगर में मोहर्रम जुलूस के दौरान क्रेन

मोहर्रम जुलूस में 40 फीट ऊपर लटकी वैन, फिर धमाका कर उड़ाए परखच्चे; वायरल Video से मचा हड़कंप

Ujjain News

उज्जैन। जिले के बड़नगर में मोहर्रम के जुलूस से जुड़ा एक वीडियो सामने आने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो में एक वैन को क्रेन की मदद से काफी ऊंचाई पर लटकाया गया और बाद में उसमें विस्फोट जैसा दृश्य दिखाई दिया। घटना के सोशल मीडिया पर वायरल होते ही प्रशासन और आयोजन व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

23 जून की रात निकले जुलूस में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। वीडियो में दिखाई देता है कि वैन के ऊपर दो युवक झंडे लहरा रहे हैं। कुछ देर बाद वाहन में तेज धमाके जैसा दृश्य बनता है, जिसके बाद आसपास मौजूद लोगों की निगाहें उसी ओर टिक जाती हैं। घटना ने स्थानीय स्तर पर बहस को जन्म दे दिया है।

वायरल वीडियो से बढ़ा विवाद

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर साझा किए गए वीडियो में केवल वाहन से जुड़ा प्रदर्शन ही नहीं, बल्कि अलग-अलग प्रकार के करतब और आतिशबाजी जैसे दृश्य भी दिखाई दे रहे हैं। वीडियो वायरल होने के बाद इसे लेकर विभिन्न संगठनों और सामाजिक समूहों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। कई लोगों ने सार्वजनिक आयोजनों में ऐसे प्रदर्शनों की जरूरत और सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े किए हैं।

मोहर्रम के जुलूस मे हमले का प्रदर्शन,उज्जैन में क्रेन पर वैन लटकाई और विस्फोट से उड़ा दिया#muhrram #celebration #Ujjain #treading pic.twitter.com/P5CJPnEz01

— Pramod Sharma (@Zeepramod) June 25, 2026

धार्मिक आयोजन से कानून-व्यवस्था तक पहुंची चर्चा

मामले ने केवल धार्मिक आयोजन की सीमा में नहीं, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही के मुद्दे पर भी चर्चा शुरू कर दी है। कुछ धार्मिक और सामाजिक प्रतिनिधियों ने पूछा है कि यदि जुलूस की अनुमति दी गई थी तो क्या इस तरह के प्रदर्शन भी अनुमति के दायरे में थे। इसी बिंदु को लेकर जिला प्रशासन से स्पष्टीकरण की मांग की जा रही है।

पुलिस ने दर्ज किया मामला

उज्जैन पुलिस ने घटना को गंभीरता से लेते हुए आयोजकों और प्रदर्शन से जुड़े लोगों के खिलाफ प्रकरण दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार आयोजक, क्रेन मालिक और वाहन पर प्रदर्शन करने वाले युवकों सहित चार लोगों पर विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच जारी है और जल्द आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अनुमति और वास्तविक प्रदर्शन में अंतर

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक जुलूस निकालने की अनुमति दी गई थी, लेकिन विस्फोटक सामग्री के इस्तेमाल की कोई मंजूरी नहीं थी। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि अलग-अलग अखाड़ों के बीच आकर्षक प्रदर्शन करने की होड़ रहती है। इसी कारण अधिक लोगों का ध्यान खींचने और सोशल मीडिया पर ज्यादा पहुंच हासिल करने के लिए ऐसे प्रयोग किए जाते हैं।

धमाके की वजह पर पुलिस का दावा

एडिशनल एसपी के अनुसार शुरुआती जांच में किसी बड़े विस्फोटक के इस्तेमाल की पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस का कहना है कि वाहन में एक साथ कई रॉकेट चलाए गए थे। वाहन के कांच बंद होने के कारण अंदर दबाव बढ़ गया और बाद में कांच टूटने के साथ जोरदार आवाज और दृश्य पैदा हुआ। यही वजह है कि वीडियो देखने वालों को यह किसी बड़े ब्लास्ट जैसा प्रतीत हुआ।

सोशल मीडिया दौर में बढ़ी प्रशासन की चुनौती

यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि धार्मिक और सार्वजनिक आयोजनों में किए जाने वाले प्रदर्शन अब केवल मौके तक सीमित नहीं रहते। कुछ सेकंड के वीडियो पूरे राज्य में चर्चा का विषय बन जाते हैं। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ आयोजन की अनुमति देने की नहीं, बल्कि सुरक्षा और कानून व्यवस्था के हर पहलू पर निगरानी बनाए रखने की भी है।