मंत्री तुलसी सिलावट का कांग्रेस पर हमला, कहा सीएम मोहन यादव की लोकप्रियता से घबराकर फैलाया जा रहा भ्रम
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिजनों पर जमीन खरीद-फरोख्त को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर प्रदेश सरकार के मंत्री तुलसी सिलावट ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की बढ़ती लोकप्रियता और विकास कार्यों से घबराकर कांग्रेस जनता के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास कर रही है। इंदौर में मीडिया से चर्चा के दौरान सिलावट ने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने अपने पद का कभी दुरुपयोग नहीं किया है।
"मुख्यमंत्री की कृषि भूमि में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई"
तुलसी सिलावट ने कहा कि विधानसभा चुनाव के दौरान दिए गए शपथ पत्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम 17 एकड़ कृषि भूमि दर्ज थी और वर्तमान में भी उतनी ही भूमि है। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री की पत्नी सीमा यादव के नाम वर्ष 2023 में 12 एकड़ कृषि भूमि थी, जो वर्ष 2026 में भी यथावत है। ऐसे में भूमि संपत्ति बढ़ाने के आरोप तथ्यहीन हैं।
मुख्यमंत्री बनने से पहले खरीदी गई थीं अधिकांश जमीनें
सिलावट के अनुसार, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जिन जमीनों की खरीद की थी, उनमें अधिकांश वर्ष 2008 से 2019 के बीच खरीदी गई थीं। यह सभी लेनदेन उनके मुख्यमंत्री बनने से पहले के हैं। उन्होंने कहा कि इन पुरानी खरीद-फरोख्त को वर्तमान पद से जोड़कर राजनीतिक विवाद खड़ा करने की कोशिश की जा रही है।
सिद्धि विनायक देवकान कंपनी को लेकर भी दी सफाई
मंत्री ने सिद्धि विनायक देवकान प्राइवेट लिमिटेड को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि यह कंपनी वर्ष 2008 में कृषि गतिविधियों के उद्देश्य से स्थापित की गई थी। सिलावट के मुताबिक, मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनकी पत्नी सीमा यादव अब कंपनी के निदेशक पद से अलग हो चुके हैं और उनके पास कंपनी के शेयर भी नहीं हैं। उन्होंने दावा किया कि कंपनी के पास नवंबर तक 68 एकड़ भूमि थी, जो जून 2026 तक घटकर 65 एकड़ रह गई है।
पुत्र और पुत्रवधू की जमीन खरीद पर भी दिया जवाब
मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री के पुत्र वैभव यादव ने वर्ष 2019 से 2023 के बीच ग्राम सावरखेड़ी में लगभग 16 एकड़ कृषि भूमि खरीदी थी, जो मुख्यमंत्री पद संभालने से पहले की खरीद है। वहीं पुत्रवधू शालिनी यादव द्वारा खरीदी गई भूमि वर्ष 2025 में खरीदी गई थी और वह उज्जैन मास्टर प्लान क्षेत्र के बाहर स्थित है।
"रिश्तेदारों के व्यवसाय को मुख्यमंत्री से जोड़ना गलत"
सिलावट ने कहा कि मुख्यमंत्री के रिश्तेदार अपने व्यवसाय और आर्थिक गतिविधियां स्वतंत्र रूप से संचालित करते हैं। उनके निजी कारोबार को मुख्यमंत्री के पद से जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि उज्जैन का मास्टर प्लान भी मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने से पहले लागू हो चुका था। यह योजना वर्ष 2023 से प्रभावी थी, जबकि डॉ. मोहन यादव ने 13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।
कांग्रेस पर साधा निशाना
मंत्री तुलसी सिलावट ने कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव ने प्रदेश में कई क्षेत्रों में नवाचार और विकास कार्य किए हैं। जनता के बीच उनकी बढ़ती स्वीकार्यता से कांग्रेस परेशान है और इसी कारण तथ्यों को तोड़-मरोड़कर राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है।