छत्तीसगढ़ के सूरजपुर में AI से तैयार मगरमच्छ की फर

मगरमच्छ का AI से फर्जी फोटो बनाकर वायरल करना पड़ा भारी, वन विभाग की जांच में खुली पोल

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सूरजपुर। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनी तस्वीर का सही उपयोग एक तरफ लोगों का काम आसान बनाता है। वहीं, दूसरी तरफ गलत इस्तेमाल डर फैलाना मुसीबत को न्योता दे सकता है। ऐसा ही मामला छत्तीसगढ़ से सामने आया। यहां एआई का उपयोग कर लोगों में डर फैलाना एक युवक को भारी पड़ गया। पुलिस ने इस मामले में युवक के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उसे गिरफ्तार कर लिया है।

दरअसल, मामला सूरजपुर जिले के रामानुजनगर क्षेत्र के ग्राम केशवपुर का है। यहां तालाब में मगरमच्छ की एआई फोटो लगाकर वायरल किया। तालाब में मगरमच्छ होने की सूचना के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। लेकिन जांच में पूरा मामला फर्जी निकला। वन विभाग की कार्रवाई के बाद सामने आया कि तालाब की वास्तविक तस्वीर में AI की मदद से मगरमच्छ की तस्वीर जोड़कर उसे सोशल मीडिया पर फैलाया गया था। 

तालाब में मगरमच्छ की सूचना पर पहुंची रेस्क्यू टीम

बता दें कि ग्राम केशवपुर के यादवपारा स्थित तालाब में मगरमच्छ दिखाई देने की सूचना 23 जुलाई को मिली थी। मगरमच्छ संरक्षित वन्यजीव श्रेणी में आता है। इसलिए वन विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया और अधिकारी, कर्मचारी तथा रेस्क्यू टीम को तुरंत मौके पर भेजा। टीम ने तालाब और आसपास के इलाके में काफी देर तक जांच की, लेकिन कहीं भी मगरमच्छ की मौजूदगी के प्रमाण नहीं मिले। इसके बाद सूचना पर संदेह बढ़ा और विभाग ने तस्वीर व पूरे मामले की जांच शुरू की।

युवक ने कबूली फर्जी तस्वीर बनाने की बात

जांच के दौरान ग्राम केशवपुर निवासी बृजलाल यादव से पूछताछ की गई। उसने स्वीकार किया कि उसने तालाब की असली फोटो में AI तकनीक के जरिए मगरमच्छ की तस्वीर जोड़कर फर्जी तस्वीर तैयार की थी। इसके बाद उसने इस फोटो को कई व्हाट्सएप समूहों में साझा कर दिया। तस्वीर वायरल होने के बाद ग्रामीणों में डर का माहौल बन गया और वन विभाग को अनावश्यक रूप से संसाधन लगाकर जांच अभियान चलाना पड़ा।

वन विभाग ने दर्ज कराई शिकायत

वन विभाग ने इस मामले को अफवाह फैलाने और सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग का गंभीर मामला बताया है। विभाग की ओर से रामानुजनगर थाने में युवक के खिलाफ प्रतिवेदन दिया गया, जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज कर पुलिस ने गिरफ्तारी की कार्रवाई की। अधिकारियों के अनुसार ऐसी फर्जी सूचनाओं से न सिर्फ लोगों में भ्रम फैलता है बल्कि वास्तविक वन्यजीव घटनाओं में विभाग की प्रतिक्रिया प्रभावित हो सकती है।

AI तस्वीरों के गलत इस्तेमाल पर चेतावनी

वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि AI या अन्य डिजिटल माध्यमों से तैयार की गई संदिग्ध तस्वीरों और वीडियो को बिना जांचे साझा न करें। किसी भी वन्यजीव की वास्तविक मौजूदगी की जानकारी मिलने पर सीधे वन विभाग को सूचना देने की अपील की गई है।