कीचड़ में स्कूल का सफर: रायसेन के इस गांव में 78 साल बाद भी सड़क नहीं, हाथ में जूते लेकर पढ़ने जाते हैं बच्चे
'पढ़ेगा इंडिया, तभी तो बढ़ेगा इंडिया' जैसे सरकारी अभियान चल रहे हैं, लेकिन रायसेन जिले के एक गांव की तस्वीर इन दावों पर सवाल खड़े करती है। सांची विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत जमुनिया के कयामपुर स्थित दौलतपुर टोला में आज भी बच्चे कीचड़ और दलदल से होकर स्कूल जाने को मजबूर हैं। आजादी के 78 साल बाद भी गांव तक पक्की सड़क नहीं पहुंची है। बारिश शुरू होते ही हालात इतने खराब हो जाते हैं कि बच्चों को कंधे पर स्कूल बैग और हाथ में जूते लेकर स्कूल तक पहुंचना पड़ता है।
बारिश आते ही गांव का संपर्क लगभग टूट जाता है
दौलतपुर टोला तक जाने वाला कच्चा रास्ता बारिश के दौरान पूरी तरह कीचड़ में बदल जाता है। ऐसे में दोपहिया वाहन तो दूर, चार पहिया वाहन और एंबुलेंस तक गांव में प्रवेश नहीं कर पाती। ग्रामीणों को मुख्य सड़क तक पहुंचने के लिए पैदल चलना पड़ता है। स्कूल जाने वाले बच्चे भी रोज इसी रास्ते से गुजरते हैं। कई बार फिसलकर गिरने से उनकी यूनिफॉर्म और किताबें खराब हो जाती हैं, लेकिन पढ़ाई जारी रखने की जिद उन्हें रोज इस मुश्किल रास्ते से गुजरने पर मजबूर करती है।
ग्रामीण बोले-हर चुनाव में वादा, लेकिन सड़क आज तक नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण की मांग को लेकर कई बार प्रशासन और जनप्रतिनिधियों को आवेदन और ज्ञापन दिए गए, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला।उनका आरोप है कि चुनाव के समय सड़क बनाने के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन मतदान खत्म होते ही मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
सिर्फ बच्चों की नहीं, मरीजों की जिंदगी भी खतरे में
सड़क नहीं होने का असर सिर्फ शिक्षा पर ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं पर भी पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पाती। किसी बीमार व्यक्ति या गर्भवती महिला को अस्पताल ले जाना हो तो पहले करीब तीन किलोमीटर पैदल चलकर मुख्य सड़क तक पहुंचना पड़ता है, जहां से वाहन मिल पाता है। आपातकालीन स्थिति में यह देरी गंभीर खतरा बन सकती है।
ग्रामीणों ने बयां किया अपना दर्द
ग्रामीण महाराज सिंह ठाकुर का कहना है कि वर्षों से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन आज तक समाधान नहीं निकला। बारिश के दिनों में गांव का संपर्क लगभग टूट जाता है।वहीं जगदीश शर्मा ने बताया कि सबसे अधिक परेशानी बच्चों और बुजुर्गों को होती है। रोज कीचड़ से होकर गुजरना किसी जोखिम से कम नहीं है।शेर सिंह ठाकुर का कहना है कि सड़क के अभाव में हर दिन मुश्किलों का सामना करना पड़ता है। कई बार आपातकालीन परिस्थितियों में समय पर मदद भी नहीं मिल पाती।
सरपंच ने क्या कहा?
ग्राम पंचायत जमुनिया की सरपंच रेखा बाई ने बताया कि सड़क निर्माण की मांग से संबंधित अधिकारियों को मौखिक और लिखित रूप से अवगत कराया जा चुका है। उन्होंने कहा कि पूर्व सरपंच के कार्यकाल में करीब दो किलोमीटर ग्रेवल रोड बनाई गई थी, लेकिन अब उसकी स्थिति पूरी तरह खराब हो चुकी है। सरपंच के मुताबिक पंचायत जल्द ही नया प्रस्ताव तैयार कर सड़क निर्माण की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगी।
विकास के दावों के बीच बड़ा सवाल
दौलतपुर टोला की तस्वीर यह सवाल खड़ा करती है कि जब बच्चे आज भी कीचड़ में चलकर स्कूल जाने को मजबूर हैं और गांव तक एंबुलेंस नहीं पहुंच पा रही है, तब ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति को लेकर गंभीर समीक्षा की जरूरत है।