रायसेन किले पर बाघ की मौजूदगी से हड़कंप, पर्यटकों की एंट्री पर रोक
भोपाल। राजधानी से लगे ऐतिहासिक रायसेन जिले के किले की पहाड़ी पर बाघ ने डेरा जमा रखा है। इसके कारण पर्यटकों की आवाजाही बंद करा दी गई है। किले के नीचे प्रवेश द्वार पर वनविभाग के हथियारों से लैंस कर्मचारी लोगों को उपर जाने नहीं दे रहे हैं।
वनविभाग के अनुसार यह बाघ पिछले करीब 15 दिनों से किले के आसपास ही है। इसकी जानकारी 15 दिन पहले वन्यजीव की इस मौजूदगी के बाद वन विभाग ने ऐहतियात के तौर पर पर्यटकों की सुरक्षा के लिए किले के कुछ हिस्सों में आवाजाही को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया है।
मॉर्निंग वॉकर्स को दिखे थे पगमार्क
इस मामले की शुरुआत तब हुई जब सुबह की सैर पर निकले कुछ लोगों को पहाड़ी पर बाघ के ताजा फुटमार्क दिखाई दिए। इसके बाद वन विभाग ने मुस्तैदी दिखाते हुए इलाके में निगरानी बढ़ा दी। किले के अलग-अलग हिस्सों में लगाए गए कैमरा ट्रैप में इस बड़े कैट की तस्वीरें और मूवमेंट लगातार रिकॉर्ड हो रही हैं।
सोमेश्वर धाम मंदिर के पास बनाया ठिकाना
वन अधिकारियों के मुताबिक, बाघ ने किले के भीतर स्थित ऐतिहासिक सोमेश्वर धाम मंदिर के पास एक पानी के कुंड के आसपास अपना ठिकाना बना लिया है। उसे कई बार वहां पानी पीते और छांव में आराम करते हुए कैमरे में देखा गया है।
रायसेन की जिला वन अधिकारी प्रतिभा शुक्ला ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था को काफी कड़ा कर दिया गया है। उन्होंने कहा, इलाके में कैमरा ट्रैप बढ़ा दिए गए हैं और पर्यटकों की एंट्री को सीमित किया गया है। हमने मुख्य प्रवेश द्वार पर बैरिकेड्स लगा दिए हैं और चेतावनी के बैनर भी पोस्ट किए हैं। संवेदनशील रास्तों पर फॉरेस्ट गार्ड्स को तैनात किया है, ताकि कोई भी पर्यटक खतरे वाले क्षेत्र में न जा सके।
पर्यटकों के लिए वन विभाग की गाइडलाइन
प्रवेश पर आंशिक रोक- मुख्य द्वार और सोमेश्वर धाम मंदिर की ओर जाने वाले संवेदनशील रास्तों को बैरिकेडिंग करके बंद कर दिया गया है। चेतावनी बोर्ड -किले की चढ़ाई और रास्तों पर जगह-जगह चेतावनी पोस्टर लगाए गए हैं, जिन पर बाघ की मौजूदगी का जिक्र है। सुरक्षा कर्मियों की तैनाती - वन विभाग के जवान तैनात किए हैं, जो पर्यटकों को तय दायरे से आगे जाने से रोक रहे हैं।