राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कूनो नेशनल पार्क में

कूनो में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का दौरा, चीता प्रोजेक्ट की प्रगति और 49 चीतों की निगरानी देखी

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श्योपुर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने कूनो नेशनल पार्क दौरे के दौरान चीता कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्हें चीता प्रोजेक्ट की मौजूदा स्थिति और निगरानी व्यवस्था की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने राष्ट्रपति को बताया कि भारत में फिलहाल कुल 52 चीते मौजूद हैं, जिनमें से 49 कूनो में हैं और बाकी तीन गांधी सागर में स्थानांतरित किए गए हैं। यह दौरा देश के महत्वाकांक्षी चीता पुनर्स्थापन कार्यक्रम के लिए अहम माना जा रहा है।

चीता सेंटर में राष्ट्रपति ने देखी निगरानी व्यवस्था

कूनो नेशनल पार्क में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने चीता कमांड एवं कंट्रोल सेंटर का दौरा किया। यहां उन्हें चीतों की ट्रैकिंग, स्वास्थ्य मॉनिटरिंग और सुरक्षा व्यवस्था के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि रेडियो कॉलर और तकनीकी सिस्टम के जरिए चीतों की हर गतिविधि पर लगातार नजर रखी जा रही है।

49 चीते कूनो और 3 गांधी सागर में स्थानांतरित

अधिकारियों ने राष्ट्रपति को बताया कि देश में कुल 52 चीते मौजूद हैं। इनमें से 49 चीते कूनो नेशनल पार्क में रह रहे हैं, जबकि तीन चीतों को गांधी सागर अभयारण्य, मंदसौर में शिफ्ट किया गया है। इस दौरान राष्ट्रपति को चीता पुनर्स्थापन कार्यक्रम की शुरुआत से अब तक की प्रगति की जानकारी भी दी गई।

बोत्सवाना से लाए गए चीतों पर विशेष जानकारी

भ्रमण के दौरान राष्ट्रपति को उन चीतों की गतिविधियों और अनुकूलन प्रक्रिया के बारे में बताया गया जिन्हें बोत्सवाना से भारत लाया गया था। अधिकारियों ने बताया कि राष्ट्रपति ने अपनी पिछली बोत्सवाना यात्रा के दौरान जिन आठ चीतों को रिसीव किया था, उन्हें बाद में कूनो में बसाया गया था।

पानी और सुरक्षा के लिए खास इंतजाम

कूनो जंगल में वन्यजीवों की सुविधा के लिए हर दो किलोमीटर पर वाटर पिट बनाए गए हैं। इनमें नियमित रूप से पानी भरा जाता है ताकि गर्मी और सूखे में वन्यजीवों को परेशानी न हो। यह व्यवस्था चीता प्रोजेक्ट की बुनियादी जरूरतों को मजबूत करती है।

अधिकारियों और प्रशासन की मौजूदगी में हुआ दौरा

इस मौके पर सीसीएफ उत्तम कुमार, कलेक्टर शीला दाहिमा और डीएफओ आर. थिरूकुराल समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। राष्ट्रपति का यह दौरा चीता संरक्षण परियोजना की प्रगति और भविष्य की दिशा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।