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बिस्तर से राष्ट्रपति भवन तक: पूजा गर्ग की कहानी, जिसने हिम्मत की नई परिभाषा लिखी

नई दिल्ली। कुछ कहानियां आंकड़ों से नहीं, हौसले से मापी जाती हैं। अंतरराष्ट्रीय पैरा एथलीट और सामाजिक कार्यकर्ता पूजा गर्ग की कहानी भी ऐसी ही है  3 दिसंबर 2025 को राष्ट्रपति भवन में जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें राष्ट्रीय बेस्ट दिव्यांगजन पुरस्कार से सम्मानित किया, तो वह पल सिर्फ एक सम्मान नहीं था वह वर्षों के दर्द, संघर्ष और संकल्प की सार्वजनिक स्वीकारोक्ति था । देशभर में इस सम्मान को महिला सशक्तिकरण और दिव्यांग अधिकारों की दिशा में एक अहम पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है।

 उनके असाधारण सामाजिक योगदान और प्रेरणादायी प्रयासों को दृष्टिगत रखते हुए आयुक्त दिव्यांगजन कार्यालय, मध्यप्रदेश शासन द्वारा आयुक्त दिव्यांगजन डॉ. अजय खेमरिया ने उन्हें एक दिन के लिए “आयुक्त दिव्यांगजन” के पद पर आसीन कर सम्मानित किया। यह पहल दिव्यांगजनों के सशक्तिकरण और उनके योगदान को मान्यता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम रही।

 मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पैरा एथलीट पूजा गर्ग को वर्ष 2025 के लिए 'श्रेष्ठ दिव्यांगजन' पुरस्कार से सम्मानित होने पर बधाई दी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि इंदौर की बेटी सुश्री पूजा ने नाथुला दर्रे पर तिरंगा फहराने वाली विश्व की पहली महिला होने की ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। मध्यप्रदेश को उन पर गर्व है।  

जब डॉक्टरों ने कहा अब चलना मुमकिन नहीं

इंदौर की रहने वाली इंजीनियर पूजा गर्ग का जीवन एक हादसे के बाद पूरी तरह बदल गया। डॉक्टरों के शब्द साफ थे चल पाना संभव नहीं है। इसके बाद 13 बड़े ऑपरेशन, 10 हजार से ज्यादा इंजेक्शन और करीब तीन साल तक बिस्तर पर ज़िंदगी लेकिन पूजा ने हार नहीं मानी। यहीं से एक नए सफर की शुरुआत हुई।

खेल बना सहारा, और पहचान भी

व्हीलचेयर पर बैठना मजबूरी थी, लेकिन रुक जाना उनकी फितरत नहीं खेल ने उन्हें न सिर्फ शारीरिक ताकत दी, बल्कि मानसिक संबल भी दिया। पहले पैरा शूटिंग में पहचान बनी, फिर पैरा कैनोइंग में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया। एशियन पैरा कैनो चैंपियनशिप 2025 में पूजा गर्ग ने भारत के लिए दो कांस्य पदक जीते । यह सिर्फ पदक नहीं थे, बल्कि उस सोच की जीत थी जो सीमाओं को चुनौती देती है।

 4,500 किमी की यात्रा, जिसने इतिहास रच दिया

2024 में पूजा ने एक ऐसा कदम उठाया, जिसे असंभव माना जा रहा था। उन्होंने इंदौर से नाथू-ला पास तक 4,500 किलोमीटर लंबी मोटर राइड पूरी की वह भी कैंसर जागरूकता के संदेश के साथ। 14,400 फीट की ऊंचाई पर तिरंगा फहराकर पूजा दुनिया की पहली पैराप्लेजिक महिला बनीं, जिनका यह रिकॉर्ड London Book of World Records में दर्ज हुआ। 

दर्द से सेवा की ओर: NGO की शुरुआत

अपने संघर्ष ने पूजा को सिर्फ मजबूत नहीं बनाया, बल्कि दूसरों के लिए कुछ करने की जिम्मेदारी भी दी। इसी सोच से जन्म हुआ पंखों की उड़ान चैरिटेबल फाउंडेशन  का। यह संस्था देशभर में महिला सशक्तिकरण, बच्चों की सुरक्षा दिव्यांग समावेशन , कैंसर सपोर्ट मानसिक स्वास्थ्य और पर्यावरण जागरूकता जैसे विषयों पर काम कर रही है।