यशस्वी साहित्य संपादक निर्मोही जी का दुर्लभ साहित्य-संग्रह सप्रे संग्रहालय को भेंट
सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं हिंदी की प्रतिष्ठित पत्रिका 'वीणा' के पूर्व संपादक स्वर्गीय मोहनलाल उपाध्याय 'निर्मोही' की स्मृति में उनके परिवार ने भोपाल स्थित माधवराव सप्रे समाचारपत्र संग्रहालय को 700 दुर्लभ पुस्तकें भेंट की हैं।
90 वर्ष तक पुरानी हैं कई पुस्तकें
10 जुलाई को निर्मोही परिवार के सुपुत्र, सेवानिवृत्त प्राचार्य डॉ. प्रकाश उपाध्याय एवं वरिष्ठ पत्रकार गिरीश उपाध्याय ने सप्रे संग्रहालय के संस्थापक पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर को यह दुर्लभ पुस्तक-संग्रह सौंपा। इनमें लगभग 90 वर्ष पुरानी कई पुस्तकें शामिल हैं, जिनमें से अनेक दुर्लभ और अब अप्राप्य हैं।
कई भाषाओं का समृद्ध साहित्य
इस संग्रह में हिंदी, संस्कृत, अंग्रेजी और फ्रेंच के अलावा गुजराती एवं राजस्थानी भाषाओं की साहित्य, आलोचना, काव्य, गद्य, इतिहास और कोश विषयक पुस्तकें शामिल हैं।पद्मश्री विजयदत्त श्रीधर ने उपाध्याय परिवार के इस योगदान की सराहना करते हुए कहा कि निर्मोही जी का यह बौद्धिक संग्रह सप्रे संग्रहालय की संदर्भ-संपदा को और समृद्ध करेगा। साथ ही, देश-विदेश से शोध के लिए आने वाले शोधार्थियों को भी इससे महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री उपलब्ध होगी।डॉ. प्रकाश उपाध्याय ने आभार व्यक्त करते हुए विश्वास जताया कि निर्मोही परिवार की यह अमूल्य धरोहर अब सप्रे संग्रहालय में सुरक्षित रहेगी और आने वाली पीढ़ियों के लिए ज्ञान एवं शोध का महत्वपूर्ण स्रोत बनेगी।