प्रमोद दुबे

गेहूं उत्पादन में मध्य प्रदेश , देश में प्रथम स्थान पर

प्रमोद दुबे

भोपाल। वर्ष 2026 में एक बार फिर से लगभग 10 वर्षों के पश्चात मध्य प्रदेश गेहूं उत्पादन में देश में सबसे बड़ा राज्य के रूप में स्थापित हुआ है। इससे पहले कोविड महामारी के कार्यकाल में यह उत्पादन इस स्थिति में पहुंचा था। पिछले 10 वर्षों के अंतराल में यह उत्पादन एवं सरकारी खरीद के रूप में सबसे बड़ा रिकॉर्ड साबित हुआ है। मुख्यमंत्री कार्यालय एवं प्रदेश के नागरिक  खाद एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री के अनुसार वर्ष 2026 के उत्पादन में गेहूं खरीदी एवं गेहूं उत्पादक देश में प्रथम स्थान पर रहा।

 लक्ष्य के विरुद्ध लक्ष्य प्राप्ति 104 लाख टन पहुंचा 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में प्रदेश में 100 लाख मीट्रिक टन निर्धारित लक्ष्य के विरुद्ध 104 लाख 22 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूँ का उपार्जन हुआ है। मध्यप्रदेश को गेहूं खरीदी के लिये 78 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन मुख्यमंत्री डॉ. यादव के प्रयासों से केन्द्र सरकार द्वारा इस लक्ष्य को 100 लाख मीट्रिक टन कर दिया गया है। खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री श्री गोविंद सिंह राजपूत ने बताया कि मध्यप्रदेश न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 13 लाख 41 हजार 266 किसानों से गेहूं का उपार्जन कर देश में नम्बर-1 है, वहीं गेहूं उपार्जन के मामले में पंजाब के बाद दूसरे स्थान पर है। कोविड-19 की अवधि को छोड़कर विगत 10 वर्षों में इस वर्ष समर्थन मूल्य पर गेहूं का सर्वाधिक उपार्जन किया गया है। प्रदेश में लघु एवं सीमांत किसानों से सबसे पहले गेहूं की खरीदी की गई। कुल 8 लाख 9 हजार 990 सीमांत एवं लघु कृषकों से 32 लाख 14 हजार मीट्रिक टन से अधिक गेहूं का उपार्जन किया गया।

 मुख्यमंत्री सहित सभी अधिकारियों ने की सतत मॉनिटरिंग 

प्रदेश में हो रहे गेहूँ उपार्जन की सतत मॉनीटरिंग की गई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने स्वयं खरीदी केन्द्रों का औचक निरीक्षण कर तौल व्यवस्था, बारदाने की उपलब्धता और खरीदी केन्द्रों पर किसानों के लिये उपलब्ध जरूरी सुविधाओं का आकस्मिक निरीक्षण भी किया। साथ ही किसानों से संवाद कर उपार्जित गेहूँ के भुगतान आदि के बारे में जानकारी ली। उन्होंने किसानों के हित में जिन किसानों ने स्लाट बुक करा लिये थे, उनके गेहूं उपार्जन की अवधि 23 मई से बढ़ाकर 28 मई तक कर दी थी।

 किसानों को हुआ 23708.13 करोड़ से अधिक का भुगतान 

किसानों को अब तक उपार्जित गेहूं का 23,708.13 करोड़ रूपये का भुगतान भी किया जा चुका है। उपार्जित गेहूं में से 96 लाख 52 हजार 957 मीट्रिक टन का परिवहन भी किया जा चुका है। यह उपार्जित गेहूं का 93 प्रतिशत है। किसानों से 2585 रूपये प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य एवं राज्य सरकार द्वारा 40 रूपये प्रति क्विंटल बोनस सहित 2625 रूपये प्रति क्विंटल की दर से गेहूं का उपार्जन किया गया है।

 प्रदेश के सभी संभागों में रिकॉर्ड उत्पादन एवं खरीदी 

रीवा संभाग में 6 लाख 15 हजार 851 मीट्रिक टन, जबलपुर में 12 लाख 73 हजार 667, शहडोल में 70 हजार 666, सागर में 8 लाख 56 हजार 968, भोपाल में 28 लाख 47 हजार 284, नर्मदापुरम में 9 लाख 22 हजार 508, उज्जैन में 22 लाख 84 हजार 47, इंदौर में 8 लाख 62 हजार 719, ग्वालियर में 4 लाख 36 हजार 805 और चंबल संभाग में 2 लाख 40 हजार 581 मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन हुआ है।

 कांग्रेसी नेताओं ने संपूर्ण मध्य प्रदेश में किसानों के नाम पर मचाई थी अराजकता

वर्ष 2026 के गेहूं उत्पादन के अंतर्गत जब खरीदी केंद्र मध्य प्रदेश सरकार ने प्रारंभ किए थे तब मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी की ओर से स्वयं प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के मार्गदर्शन में मालवांचल सहित प्रदेश के लगभग 70% खरीदी केंद्रों पर खरीदी के नाम पर भ्रष्टाचार अथवा किसनों की परेशानी को लेकर आंदोलन भी लगातार जारी रहे। पिछले 2 महीने के अंतराल में जब से खरीदी के संबंध में मध्य प्रदेश सरकार ने आदेश जारी किए तब से ही कांग्रेस के नेताओं ने सभी खरीदी केंद्रों पर आंदोलन के रूप में अराजकता का माहौल खड़ा किया। उसके बाद भी जब प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने खरीदी केंद्रों पर अचानक स्वयं पहुंचकर प्रशासनिक अधिकारियों के बीच माहौल तैयार किया तब जाकर कुशल खरीदी एवं भुगतान की स्थितियां मजबूत होती चली गई। और अंततः मध्य प्रदेश में एक बार फिर से देश के समक्ष गेहूं उत्पादन में अपना एक रिकॉर्ड स्थापित किया।