मध्य प्रदेश में ग्रामीण-शहरी स्वास्थ्य सुविधाओ में अंत: गांवों में पेयजल, शिक्षा और महिलाओं की स्थिति शहरों से काफी पीछे
भोपाल। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (NFHS-6, 2023-24) की रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच मौजूद स्वास्थ्य एवं सामाजिक असमानता की तस्वीर सामने रखी है। रिपोर्ट बताती है कि शिक्षा, स्वच्छ पेयजल, महिला सशक्तिकरण और स्वास्थ्य सुविधाओं तक पहुंच जैसे कई महत्वपूर्ण मानकों पर गांव अभी भी शहरों से काफी पीछे हैं। रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में 98.8% आबादी को बेहतर पेयजल स्रोत उपलब्ध हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह आंकड़ा केवल 85.4% है। यानी लगभग हर सात में से एक ग्रामीण परिवार अभी भी सुरक्षित पेयजल की पर्याप्त सुविधा से वंचित है।
महिलाओं की शिक्षा में बड़ा अंतर
NFHS-6 के आंकड़े बताते हैं कि 6 वर्ष और उससे अधिक आयु की 83.9% शहरी महिलाएं कभी न कभी स्कूल गई हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में यह अनुपात केवल 64.9% है। यानी करीब 19 प्रतिशत अंक का अंतर आज भी मौजूद है। इसी तरह 10 या उससे अधिक वर्ष की स्कूली शिक्षा प्राप्त करने वाली महिलाओं का प्रतिशत शहरों में 54% है, जबकि गांवों में यह घटकर 26% रह जाता है।
इंटरनेट और मोबाइल पहुंच में भी अंतर
डिजिटल सशक्तिकरण के मामले में भी ग्रामीण क्षेत्र पीछे हैं। महिलाओं के स्वयं उपयोग किए जाने वाले मोबाइल फोन का प्रतिशत शहरी क्षेत्रों में 90.3% जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 78.2% दर्ज किया गया है।
बच्चों की प्री-स्कूल शिक्षा में भी खाई
2 से 4 वर्ष आयु के बच्चों की प्री-स्कूल उपस्थिति शहरों में 57.1% है, जबकि गांवों में यह 45.4% दर्ज की गई। इससे शुरुआती शिक्षा तक पहुंच में भी स्पष्ट असमानता दिखाई देती है।
स्वास्थ्य बीमा में गांव आगे, लेकिन वजह अलग
दिलचस्प बात यह है कि स्वास्थ्य बीमा कवरेज के मामले में ग्रामीण क्षेत्र अपेक्षाकृत बेहतर स्थिति में दिखाई देते हैं। रिपोर्ट के अनुसार 76% ग्रामीण परिवारों में कम से कम एक सदस्य किसी स्वास्थ्य बीमा या वित्तीय सुरक्षा योजना से जुड़ा है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 67.2% है। विशेषज्ञ इसका कारण आयुष्मान भारत और अन्य सरकारी योजनाओं का ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापक विस्तार मानते हैं।
एक नजर में ग्रामीण-शहरी अंतर
| संकेतक | शहरी (%) | ग्रामीण (%) |
|---|---|---|
| बेहतर पेयजल स्रोत | 98.8 | 85.4 |
| स्कूल गई महिलाएं (6+ वर्ष) | 83.9 | 64.9 |
| 10+ वर्ष शिक्षित महिलाएं | 54.0 | 26.0 |
| प्री-स्कूल जाने वाले बच्चे | 57.1 | 45.4 |
| स्वास्थ्य बीमा कवरेज वाले परिवार | 67.2 | 76.0 |
| महिलाओं के पास स्वयं का मोबाइल | 90.3 | 78.2 |
स्रोत: NFHS-6 (2023-24), मध्य प्रदेश फैक्ट शीट
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रदेश में स्वास्थ्य और पोषण संबंधी चुनौतियों को कम करने के लिए केवल चिकित्सा सुविधाएं बढ़ाना पर्याप्त नहीं होगा। शिक्षा, स्वच्छ पेयजल, डिजिटल पहुंच और महिला सशक्तिकरण जैसे सामाजिक संकेतकों में सुधार किए बिना ग्रामीण-शहरी अंतर को पाटना मुश्किल होगा।