ड्रग्स के खिलाफ ऑपरेशन करने वाली टीम ही घेरे में, MP के 2 TI समेत 100 पर राजस्थान में FIR
राजस्थान और मध्य प्रदेश पुलिस से जुड़ा एक मामला अब कानून और जांच एजेंसियों के लिए बड़ी परीक्षा बन गया है। जिस कार्रवाई को ड्रग्स के खिलाफ बड़ी सफलता बताया गया था। अब उसी पर अदालत की सख्त नजर पड़ गई है। झालावाड़ जिले के घाटाखेड़ी गांव में हुई NDPS कार्रवाई को लेकर चौमहला कोर्ट के आदेश पर मध्य प्रदेश के दो थाना प्रभारियों समेत करीब 100 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। आरोपों की गंभीरता ने पूरे घटनाक्रम को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है।
इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि अदालत तक पहुंचे विवाद में पुलिस कार्रवाई की वैधता, दस्तावेजी रिकॉर्ड और प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। अब जांच यह तय करेगी कि कार्रवाई में कहीं कानूनी सीमाओं का उल्लंघन तो नहीं हुआ।
ड्रग्स फैक्ट्री के दावे पर उठे सवाल
जनवरी 2026 में आगर पुलिस ने एक आरोपी की निशानदेही पर राजस्थान के घाटाखेड़ी गांव में दबिश दी थी। उस समय बड़ी मात्रा में मादक पदार्थ और ड्रग्स बनाने में इस्तेमाल होने वाली सामग्री बरामद करने का दावा किया गया था। पुलिस ने इसे बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया था। लेकिन बाद की जांच में कई ऐसे तथ्य सामने आए जिन्होंने पूरे ऑपरेशन को संदेह के घेरे में ला दिया।
जांच में रिकॉर्ड और दावों का नहीं मिला मेल
जांच के दौरान सामने आया कि जिस कार्रवाई की वीडियोग्राफी होने का दावा किया गया था। उसका रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला। राजस्थान पुलिस की भागीदारी का भी दावा किया गया। लेकिन जांच में पता चला कि स्थानीय पुलिस को कार्रवाई की जानकारी तक नहीं थी। पुलिस रिकॉर्ड में दर्ज समय और उपलब्ध सीसीटीवी तथा अन्य तकनीकी साक्ष्यों के बीच भी अंतर सामने आया, जिससे कार्रवाई की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए।
परिवार की शिकायत से खुली जांच की राह
गिरफ्तार किए गए आरोपियों के पिता हमीद खान शुरुआत से ही कार्रवाई को फर्जी बताते रहे। उनका आरोप था कि मध्य प्रदेश पुलिस ने स्थानीय पुलिस को सूचना नहीं दी। साथ ही उनके घर में प्रवेश किया और परिवार के साथ दुर्व्यवहार किया। इसी शिकायत के आधार पर मामला अदालत पहुंचा। जिसके बाद स्वतंत्र जांच कराई गई और कई महत्वपूर्ण तथ्यों की पड़ताल हुई।
कोर्ट के आदेश के बाद दर्ज हुई FIR
जांच रिपोर्ट में तलाशी, गिरफ्तारी और जब्ती से जुड़े कई जरूरी रिकॉर्ड नहीं मिलने की बात सामने आई। रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद अदालत ने FIR दर्ज करने के आदेश दिए। इसके बाद आगर कोतवाली थाना प्रभारी शशि उपाध्याय, बड़ौद थाना प्रभारी रूप सिंह, एसआई राखी गुर्जर, एएसआई अजय जाट समेत करीब 100 ज्ञात और अज्ञात लोगों को मामले में आरोपी बनाया गया।
जांच का दायरा अभी और बढ़ सकता है
FIR दर्ज होने के बाद अब मामला शुरुआती चरण से आगे बढ़ चुका है। जांच एजेंसियां आरोपों की परतें खोलने में जुटी हैं और संभावना जताई जा रही है कि आगे और नाम सामने आ सकते हैं। यदि जांच में नए तथ्य मिलते हैं तो आरोपों की धाराएं भी बढ़ सकती हैं। ऐसे में यह मामला सिर्फ एक पुलिस कार्रवाई तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि कानून लागू करने वाली एजेंसियों की जवाबदेही से भी जुड़ गया है।