निजी स्कूलों में महंगी किताबों पर NHRC का सख्त रुख, राज्यों से मांगा जवाब
भोपाल। निजी स्कूलों में अभिभावकों की जेब पर पडऩे वाले महंगी किताबों के बोझ को लेकर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने मध्यप्रदेश समेत सभी राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर दिया है। आयोग ने पूछा है कि जब देश में एनसीईआरटी और राज्य सरकारों के पाठ्य पुस्तक निगम जैसी संस्थाएं मानक पुस्तकें तैयार करती हैं, तो निजी प्रकाशकों की किताबों को प्राथमिकता क्यों दी जा रही है? मध्यप्रदेश में स्कूल शिक्षा विभाग को ये नोटिस दिया गया है।
आयोग के राष्ट्रीय सदस्य प्रियंक कानूनगो ने बकाया कि खंडपीठ का कड़ा रुख यह पूरी कार्रवाई नमो फाउंडेशन की उस शिकायत के आधार पर हुई है, जिसमें निजी स्कूलों ने कमीशन के चक्कर में महंगी और भारी-भरकम किताबें थोपने का आरोप लगाया गया था। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने न केवल राज्यों से रिपोर्ट मांगी है, बल्कि शिक्षा मंत्रालय को भी जवाब तलब किया है।
उन्होंने कहा कि आयोग की तरफ से छात्रों और अभिभावकों पर निजी पब्लिशर्स की महंगी किताबें खरीदने के लिए दबाव डालने के मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए मध्यप्रदेश सरकार को नोटिस जारी कर दिया है। आयोग ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण संवैधानिक सवाल उठाया है। आयोग का मानना है कि सरकारी और निजी स्कूलों में अलग-अलग पाठ्यक्रम और अलग-अलग किताबें लागू करना अकादमिक भेदभाव की श्रेणी में आ सकता है।