मप्र हाईकोर्ट ने 250 से अधिक जजों के तबादले किए। स

MP हाईकोर्ट ढाई सौ से ज्यादा जज इधर से उधर

मप्र उच्च न्यायालय द्वारा रविवार, 5 अप्रैल को देर रात ढाई सौ से ज्यादा जजों के तबादला आदेश जारी किए गए। न्यायालय प्रशासन द्वारा एक साथ पांच अलग-अलग आदेश जारी किए गए। इनमें सिविल जज (सीनियर और जूनियर डिवीजन), मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट और अन्य महत्वपूर्ण पद शामिल हैं। इस बड़े पैमाने के फेरबदल को न्यायिक प्रशासन के पुनर्गठन की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इस पूरे फेरबदल में न्यायिक संतुलन, कार्यक्षमता और पारदर्शिता को ध्यान में रखा गया है। उच्च न्यायालय ने सभी स्थानांतरित न्यायिक अधिकारियों को निर्देशित किया है कि वे 20 अप्रैल 2026 तक अपने वर्तमान पद से कार्यमुक्त होकर नवीन पदस्थापना स्थल पर कार्यभार ग्रहण करें। इतने बड़े पैमाने पर हुए तबादलों को प्रदेश की न्यायिक व्यवस्था में एक बड़े बदलाव के रूप में देखा जा रहा है।

सीनियर डिवीजन

आदेश क्रमांक 355/2026 के तहत सिविल जज (सीनियर डिवीजन) के 58 अधिकारियों का स्थानांतरण किया गया है। इसमें अतुल यादव, पुष्पराज सिंह उइके, अमित नागयाच, विजय कुमार पाठक और तथागत याज्ञिक जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं, जिनके कार्यक्षेत्र में बदलाव करते हुए प्रदेश के विभिन्न जिलों में नई जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। इसके अलावा जितेंद्र मेहर, नरेंद्र भंडारी, विक्रम सिंह डावर, रवींद्र शिल्पी, सूर्यपाल सिंह राठौर सहित कई अन्य अधिकारियों को भी एक जिले से दूसरे जिले में भेजा गया है।

जूनियर डिवीजन

वहीं आदेश क्रमांक 359/2026 के तहत सिविल जज (जूनियर डिवीजन) स्तर पर सबसे बड़ा फेरबदल किया गया है, जिसमें 190 से अधिक न्यायिक अधिकारियों के तबादले शामिल हैं। इस सूची में अमन सुलिया, अंशुल ताम्रकार, सौरभ गोस्वामी, विवेक सिंह राजन, दिव्या रामटेके, प्राची सिंह पटेल, अंकिता जैन और ब्रजेश कुमार चंसोरिया जैसे कई नाम प्रमुख रूप से सामने आए हैं। इस व्यापक सूची में प्रदेश के लगभग सभी जिलों से जुड़े न्यायिक अधिकारियों को नई पदस्थापना दी गई है।

इसके अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) स्तर पर भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जहां कई जिलों में नए सीजेएम की नियुक्ति की गई है। साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) और राज्य न्यायिक अकादमी में भी अधिकारियों की नई तैनाती कर प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने का प्रयास किया गया है।इस बड़े पैमाने के तबादलों को न्यायिक कार्यप्रणाली में व्यापक प्रभाव डालने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है।