E-अटेंडेंस पर सरकार सख्त, लेकिन 90% उपस्थिति से चूके अतिथि शिक्षकों को मिलेगी राहत
भोपाल। मध्य प्रदेश में शिक्षकों की ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर सरकार ने अपना रुख साफ कर दिया है। स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि सभी शिक्षकों के लिए ई-अटेंडेंस अनिवार्य रहेगी और इसमें किसी तरह की सामान्य छूट नहीं दी जाएगी। वहीं, दूसरी ओर 90 प्रतिशत उपस्थिति पूरी नहीं कर सके हजारों अतिथि शिक्षकों को राहत देने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने नई व्यवस्था लागू की है।
सरकार का कहना है कि शिक्षा व्यवस्था में अनुशासन बनाए रखना जरूरी है, लेकिन जिन मामलों में वास्तविक कारणों से उपस्थिति पूरी नहीं हो सकी है, वहां जिला स्तर पर जांच के बाद फैसला लिया जाएगा। इससे ई-अटेंडेंस व्यवस्था भी जारी रहेगी और पात्र शिक्षकों को अपनी बात रखने का अवसर भी मिलेगा।
ई-अटेंडेंस पर सरकार ने नहीं बदला रुख
बैतूल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि सभी शिक्षकों को तय समय पर स्कूल पहुंचकर ई-अटेंडेंस दर्ज करनी होगी। उन्होंने बताया कि प्रदेश में करीब 98 प्रतिशत अतिथि शिक्षक और 90 प्रतिशत नियमित शिक्षक पहले से ही इस व्यवस्था का पालन कर रहे हैं। कुछ मामलों की वजह से पूरी प्रणाली को कमजोर नहीं किया जा सकता। हालांकि जिन इलाकों में नेटवर्क की समस्या है या महिला शिक्षकों के मातृत्व अवकाश तथा अन्य विशेष परिस्थितियां हैं, वहां पहले की तरह आवश्यक राहत जारी रहेगी।
90% उपस्थिति पूरी नहीं करने वालों को राहत
ई-अटेंडेंस को लेकर जारी विवाद के बीच लोक शिक्षण संचालनालय ने करीब आठ हजार अतिथि शिक्षकों को राहत देने का फैसला किया है। जिनकी शैक्षणिक सत्र 2025-26 के दौरान 90 प्रतिशत उपस्थिति पूरी नहीं हो सकी, वे संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में ई-मेल के माध्यम से आवेदन कर सकेंगे। उनके मामलों की जांच जिला शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में बनने वाली तीन सदस्यीय समिति करेगी और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
री-जॉइनिंग विवाद के बाद बदली व्यवस्था
2 जुलाई को विभाग ने निर्देश जारी किए थे कि केवल वे अतिथि शिक्षक री-जॉइनिंग के पात्र होंगे जिनकी फरवरी से अप्रैल 2026 के बीच ई-अटेंडेंस 90 प्रतिशत या उससे अधिक रही हो। इसी शर्त का प्रदेशभर में विरोध शुरू हो गया। अतिथि शिक्षकों का कहना है कि केवल उपस्थिति को आधार बनाना उचित नहीं है। उनका तर्क है कि यदि किसी शिक्षक ने बेहतर परीक्षा परिणाम दिए हैं लेकिन उसकी उपस्थिति 90 प्रतिशत से थोड़ी कम है, तो उसे री-जॉइनिंग से वंचित करना न्यायसंगत नहीं होगा। नई समिति व्यवस्था को इसी विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
टीईटी और चेक पोस्ट पर भी सरकार का रुख साफ
मंत्री उदय प्रताप सिंह ने शिक्षकों की पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है और सरकार अदालत के अंतिम फैसले का पालन करेगी। वहीं परिवहन विभाग के इंटीग्रेटेड चेक पोस्टों को लेकर उन्होंने संकेत दिए कि हाईकोर्ट में दायर रिव्यू पिटिशन के बाद सरकार डिजिटल और पारदर्शी व्यवस्था के साथ इन्हें दोबारा शुरू करने की संभावनाओं का अध्ययन कर रही है।