एमपी - पहली बार हुए डिजीटली जनगणना में बढ़े 90 लाख आवास
भोपाल। वर्ष 2026 में देश में पहली बार हुई डिजीटली जनगणना में मध्य प्रदेश में 2.40 करोड़ मकान चिन्हित किए गए है, जबकि 2011 में 1.5 करोड़ आवास थे। इस तरह डेढ़ दशक बाद हुई जनगणना में आवासों की संख्या बढक़र 90 लाख हो गई है। चूंकि पहली बार भारत में जनगणना इस साल पूरी तरह डिजीटलीकृत हुई है। इससे पहले 2011 की जनगणना मेन्यूअल हुई थी। अब आठ माह बाद व्यक्तिगत जनगणना होगी। खास बात ये है कि मध्यप्रदेश में इस साल की जनगणना में करीबन 0.80 प्रतिशत मकानों में ताले पाए गए।
जनगणना विभाग के अधिकारियों के अनुसार 2011 में प्रदेश में 1.49 करोड़ मकान थे, लेकिन इस साल मई में हुए मकान सूचीकरण गणना के प्रथम चरण में 2.40 करोड़ यानि 24 मिलियन से अधिक मकानों को डिजिटल रूप से दर्ज किया गया है। अधिकारियों का कहना हैकि ये आंकड़े संभवत: थोड़े बहुत और बढ़ सकते हैं, क्योंकि डिजीटलाइजेशन का कार्य अंतिम चरणों में हैं। पहली बार डिजीटली जनगणना में 15 अप्रैल से 5 मई तक प्रदेश में सात लाख लोगों ने आनलाइन गणना किया। उसके बाद करीबन 1.44 प्रगणकों की मदद से घर- घर जाकर सर्वे की गई।
समय सीमा में हुआ मकान सूचीकरण कार्य
जनगणना संचालनालय के अनुसार मध्यप्रदेश में मकान गणना एचएलओ का फील्ड वर्क निर्धारित समय सीमा में सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। एक मई से 30 मई तक चले इस अभियान की खासियत ये रही कि सर्वे में अनमानित संख्या से अधिक मकानों को कवर किया गया, जिससे प्रदेश का प्रदर्शन 100.99 प्रतिशत दर्ज हुआ। प्रदेश में 1.37 लाख से अधिक हाउस लिस्टिंग ब्लॉकों में 1.24 लाख से ज्यादा प्रगणकों ने घर-घर पहुंचकर जानकारी एकत्र की। दरअसल सर्वे के दौरान 2 करोड़ 38 लाख 33 हजार मकानों को कवर करने का लक्ष्य था, जबकि वास्तविक रूप से 2 करोड़ 40 लाख 69 हजार से अधिक मकानों की गणना की गई।
पहली बार मिले 8.33 प्रतिशत लॉक हाउस
भवन गणना में सबसे बड़ा और चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आए। जिसमें बंद मकान यानी लॉक हाउस की श्रेणी देखने को मिली है। पिछले डेढ़ दशक में बंद मकानों का अनुपात लगभग दोगुना हुआ है। 2011 की जनगणना में मध्य प्रदेश में मात्र 0.4 प्रतिशत मकान ऐसे मिले थे, जिन पर ताले लटके हुए थे। लेकिन 2026 के आंकड़ों में ये बढक़र दुगुना यानि 0.8 प्रतिशत हो गया है। फिलहाल ये आंकड़े प्रारंभिक है। जनगणना के अंतिम आंकड़े जल्द ही केंद्र सरकार अधिकृत रूप से जारी करेगी।
जनगणना अधिकारियों का मानना है कि लॉक हाउस की बढ़ी संख्या के पीछे रोजगार और शिक्षा के सिलसिले में महानगरों की ओर पलायन, या फिर एक से अधिक शहरों में मकान रखने की आधुनिक जीवनशैली हो सकती है।
जबलपुर में मिले सर्वाधिक लॉक हाउस
मध्यप्रदेश में जिलों में प्रारंभिक सर्वे में जबलपुर में सबसे ज्यादा 4 हजार से ज्यादा घरों में ताले लगे मिले। दूसरे नबंर पर इंदौर, भोपाल और छतरपुर रहे, जहां 2500 से 3000 मकानों मेंं ताला मिला। अधिकारियों ने बताया कि लॉक हाउस के ये आंकड़े प्रारंभिक स्थिति के हैं। एक सप्ताह के भीतर अंतिम आंकड़े आते ही जारी कर दिए जाएंगे।
सिर्फ जानकारियां रहेगी गोपनीय
जनगणना अधिकारियों के अनुसार, नागरिकों से प्रदेश में मिली सभी व्यक्तिगत जानकारियां गोपनीय रखी जाएगी। जनगणना अधिनियम-1948 और जनगणना नियमावली-1990 के तहत इन जानकारियों का प्रकाशन प्रतिंबधित है। केंद्र सरकार इन आंकड़ों का उपयोग केवल नीति निर्माण और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए किया जाएगा। बता दें कि प्रदेश में 1.44 लाख कर्मचारी प्रगणकों और सुपरवाइजरों ने मिलकर जनगणना का पहला चरण कार्य पूरा किया है।
इनका कहना है..
नोडल अधिकारी जनगणना शिल्पा गुप्ता का कहना है कि प्रदेश में आवासों की जनगणना का पहला चरण पूर्ण हो चुका है। प्रारंभिक तौर पर 2011 की तुलना में करीबन 90 लाख आवासों की संख्या बढ़े हैं। यह 2026 की नवीनतम जनगणना का पहला चरण था, जिसके बाद निवासियों की गणना की जाएगी।