व्यावसायिक एलपीजी पर लगी पाबंदी हटते ही मध्य प्रदे

व्यावसायिक एलपीजी बैन हटते ही उद्योगों को राहत, MP के हजारों यूनिट्स फिर सक्रिय

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भोपाल और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों में लंबे समय से चल रहा व्यावसायिक एलपीजी संकट आखिरकार खत्म हो गया है। केंद्र सरकार द्वारा आपूर्ति पर लगी पाबंदी हटाने के बाद हजारों छोटे-बड़े उद्योगों ने राहत की सांस ली है, जो पिछले तीन महीनों से उत्पादन ठप होने या धीमा चलने की मार झेल रहे थे। गोविंदपुरा, मंडीदीप और पीथमपुर जैसे बड़े औद्योगिक केंद्रों में गैस की कमी से फैक्ट्रियों की रफ्तार टूट गई थी। कई यूनिट्स बंदी के कगार पर पहुंच गई थीं, जबकि उत्पादन लागत भी असामान्य रूप से बढ़ गई थी।

उद्योगों की सांस लौटी

व्यावसायिक एलपीजी पर लगी पाबंदी हटने के बाद सबसे बड़ी राहत MSME सेक्टर को मिली है, जहां गैस पर आधारित उत्पादन इकाइयों का बड़ा हिस्सा प्रभावित था। गोविंदपुरा में करीब 800, मंडीदीप में 600 और देवास में 1500 से ज्यादा उद्योगों को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। उद्योगपतियों का कहना है कि लंबे समय बाद सप्लाई सामान्य होने से अब उत्पादन पटरी पर लौट सकेगा और ग्रोथ की संभावनाएं फिर से बनेंगी।

तीन महीने के संकट में कई यूनिट बंद की कगार पर

पिछले तीन महीनों में एलपीजी सप्लाई बाधित रहने से औद्योगिक उत्पादन पर गहरा असर पड़ा। कई फैक्ट्रियों में कामकाज या तो धीमा हो गया या पूरी तरह रुक गया। पीथमपुर और भोपाल जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में सैकड़ों छोटे यूनिट्स को संचालन जारी रखने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा। खासकर गैस आधारित प्रोसेसिंग और केमिकल यूनिट्स सबसे ज्यादा प्रभावित रहीं, जहां उत्पादन लागत भी कई गुना बढ़ गई थी।

मंडीदीप और पीथमपुर में सबसे ज्यादा असर

मंडीदीप में इंडस्ट्री एसोसिएशन के अनुसार करीब 80 से 90 प्रतिशत फैक्ट्रियां किसी न किसी रूप में प्रभावित हुईं। उत्पादन घटने के साथ-साथ संचालन लागत में भी इजाफा हुआ, जिससे छोटे उद्योगों पर दबाव बढ़ गया। पीथमपुर में दवा, इंजीनियरिंग और केमिकल सेक्टर की कई कंपनियां सीलिंग और प्रोसेसिंग जैसी जरूरी प्रक्रियाओं को नियमित रूप से नहीं चला पा रही थीं, जिससे सप्लाई चेन भी प्रभावित हुई।

नई शुरुआत की उम्मीद

पाबंदी हटने के बाद उद्योग जगत में सकारात्मक माहौल देखा जा रहा है। उद्यमियों का मानना है कि सप्लाई सामान्य होने से न सिर्फ रुकी हुई उत्पादन इकाइयां फिर से चालू होंगी बल्कि भविष्य में विस्तार योजनाओं को भी गति मिलेगी। सरकार के इस फैसले को उद्योग जगत ने राहत भरा कदम बताया है, जिससे प्रदेश के लाखों MSME सेक्टर को स्थिरता मिलने की उम्मीद बढ़ गई है।