टाइगर स्टेट में टाइगर पर संकट: 54 मौतों के बाद मैदान में उतरे ‘जंगल कमांडो’
मध्यप्रदेश के अभ्यारण्यों में बाघों को अब 'जंगल कमांडो' बचाएंगे। 'जंगल कमांडो' नाम से चौंकना स्वाभाविक है, लेकिन राज्य में बाघों की रिकॉर्ड मौतों के बाद सरकार ने उनकी सुरक्षा के लिए बड़ा मॉडल तैयार किया है।
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के लिए विशेष 'टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स' का गठन किया गया है, जिन्हें पुलिस ट्रेनिंग स्कूल पचमढ़ी में 'जंगल कमांडो' के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है। अब ड्रोन, साइबर इंटेलिजेंस और हथियारों के प्रशिक्षण से लैस ये कमांडो शिकारियों के लिए काल बनेंगे।सरकार ने इस फोर्स के लिए 24 युवाओं को कमांडो प्रशिक्षण देना शुरू कर दिया है।
संकट में जंगल का राजा
वर्ष 2025 में प्रदेश ने 54 बाघों को खो दिया। 2026 में सतपुड़ा और कान्हा टाइगर रिजर्व में अवैध शिकार, जहर देने, करंट लगाने और सीमित होते क्षेत्र की वजह से लगातार बाघों की मौत हो रही है।सतपुड़ा में हाल ही में दो बाघों की मौत ने वन विभाग की पुरानी कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए थे, जिसके बाद यह नया सुरक्षा मॉडल तैयार किया गया है।
पुलिस जैसी होगी ट्रेनिंग
इस नई फोर्स को तैयार करने की जिम्मेदारी पुलिस प्रशिक्षण संस्थान को सौंपी गई है। अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (प्रशिक्षण) राजाबाबू सिंह के मुताबिक, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के डायरेक्टर के अनुरोध पर एक कस्टमाइज्ड ट्रेनिंग प्रोग्राम तैयार किया जा रहा है।
30 दिनों का आधुनिक पाठ्यक्रम
प्रोटेक्शन फोर्स के लिए 30 दिनों का पाठ्यक्रम तैयार किया गया है, जो बेहद आधुनिक है। इसे दो हिस्सों में बांटा गया है। आंतरिक प्रशिक्षण: वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की बारीकियां, मानवाधिकार, अपराध जांच और इंटेलिजेंस कलेक्शन, मैदानी प्रशिक्षण: पुलिस ट्रेनिंग स्कूल पचमढ़ी में शारीरिक और जंगल कमांडो ट्रेनिंग
साल 2025 में 54 बाघों की रिकॉर्ड मौतों और 2026 के शुरुआती तीन महीनों में ही 18 से अधिक बाघों के शिकार और मृत्यु ने पूरे तंत्र को कटघरे में खड़ा कर दिया है। इसी संकट के बीच वन मुख्यालय भोपाल ने बड़ा फैसला लेते हुए सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में विशेष 'टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स' (TPF) का गठन किया है, जिसके तहत चयनित 24 युवाओं को पुलिस ट्रेनिंग स्कूल (PTS) पचमढ़ी में 'जंगल कमांडो' के रूप में प्रशिक्षित किया जा रहा है।