'विकास भी, विरासत भी' के मंत्र पर आगे बढ़ेगा मध्यप्रदेश, भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन बनेगा ग्लोबल टूरिज्म हब
दो विश्व धरोहर स्थलों के साथ मां नर्मदा की आस्था से पर्यटन मानचित्र पर मजबूत दस्तक
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा नवगठित भोपाल मेट्रोपॉलिटन रीजन (बीएमआर) केवल औद्योगिक और तकनीकी विकास का केंद्र ही नहीं बनेगा, बल्कि 'विकास भी, विरासत भी' के मूल मंत्र को साकार करते हुए देश के सबसे बड़े ग्लोबल टूरिज्म हब के रूप में भी उभरेगा।12,099 वर्ग किलोमीटर में फैले इस क्षेत्र में प्राचीन इतिहास, आध्यात्मिक चेतना, प्राकृतिक सौंदर्य और मां नर्मदा की आस्था का ऐसा अनूठा संगम है, जो दुनिया भर के पर्यटकों को आकर्षित करने की अपार क्षमता रखता है।
बीएमआर की सबसे बड़ी ताकत इसकी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत है। पूरे क्षेत्र के केंद्र में दो यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल सांची और भीमबेटका स्थित हैं। ये दोनों स्थल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मध्य प्रदेश को विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान दिलाते हैं।बीएमआर के पर्यटन ढांचे में भोजपुर-भीमबेटका कॉरिडोर सबसे बड़ा क्राउड पुलिंग (पर्यटकों को आकर्षित करने वाला) केंद्र बनकर उभर रहा है। अपनी गहरी धार्मिक और आध्यात्मिक आस्था के कारण अकेले भोजपुर में वर्ष 2024 के दौरान 35.9 लाख (3.59 मिलियन) श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचे, जिससे यह क्षेत्र का सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थल बन गया।
पर्यटन को नई गति देने के लिए इस रीजन का विकास हब एंड स्पोक मॉडल पर किया जाएगा। इसके तहत भोपाल मुख्य हब (केंद्र) होगा, जहां से हाई-स्पीड कनेक्टिविटी के माध्यम से पर्यटकों को सांची, भीमबेटका, भोजपुर और अन्य प्रमुख स्थलों तक पहुंचाया जाएगा।
धर्म, संस्कृति, आध्यात्म और प्रकृति का अनूठा संगम
बीएमआर में भोपाल, सांची, उदयगिरि, भोजपुर, भीमबेटका, रातापानी, नरसिंहगढ़, चिड़ी-खो, जगदीशपुरा और मां नर्मदा जैसे धार्मिक, सांस्कृतिक एवं प्राकृतिक महत्व के स्थल पर्यटन की नई पहचान बनेंगे।
पर्यावरण को सुरक्षित रखते हुए इको-टूरिज्म का विस्तार
सरकार हरित संपदा को संरक्षित रखते हुए पर्यटन का विकास कर रही है। बीएमआर का 18.8 प्रतिशत क्षेत्र (2,285 वर्ग किलोमीटर) घने वनों से आच्छादित है, जिसमें रातापानी और चिड़ी-खो जैसे महत्वपूर्ण वन्यजीव अभयारण्य शामिल हैं।पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक सफारी जैसी नवाचार आधारित पहल शुरू की जा रही हैं। वहीं, स्थानीय समुदायों की आजीविका को मजबूत करने के उद्देश्य से सीहोर और विदिशा में सात विशेष इको-टूरिज्म गांव विकसित किए गए हैं।
पर्यटन नीति-2025 से मिलेगा इंफ्रास्ट्रक्चर को बल
आंकड़ों के विश्लेषण से स्पष्ट हुआ है कि जहां भोपाल, सांची और विदिशा में होटल एवं कनेक्टिविटी का बेहतर नेटवर्क उपलब्ध है, वहीं सीहोर के ग्रामीण क्षेत्रों और रायसेन के आंतरिक इलाकों में अभी पर्यटन अधोसंरचना के विस्तार की आवश्यकता है।इस कमी को दूर करने के लिए मध्य प्रदेश पर्यटन नीति-2025 के तहत निजी निवेश को बड़े स्तर पर आमंत्रित किया जा रहा है। नई परियोजनाओं के लिए 15 प्रतिशत कैपिटल सब्सिडी दी जाएगी, जबकि पुरानी विरासत इमारतों के पुनर्विकास के लिए 90 वर्ष की दीर्घकालिक लीज का प्रावधान किया गया है।
रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा पर्यटकों का आंकड़ा
वर्ष 2011 में जहां इस क्षेत्र में 19.4 लाख पर्यटक पहुंचे थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 77.3 लाख हो गई। यानी 13 वर्षों में 57.9 लाख पर्यटकों की बढ़ोतरी दर्ज हुई, जो लगभग 298 प्रतिशत की वृद्धि है।
स्थानीय कला और संस्कृति को मिलेगा वैश्विक मंच
पर्यटन का यह नया मॉडल केवल ऐतिहासिक स्मारकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि स्थानीय कला और शिल्प को भी वैश्विक बाजार से जोड़ेगा। भोपाल और सीहोर की प्रसिद्ध जरी-जरदोजी कढ़ाई तथा जूट क्राफ्ट, जबकि नर्मदापुरम की नक्काशीदार लकड़ी की कला को प्रमुख पर्यटन सर्किट से जोड़ा जा रहा है।इसके साथ ही सांची बौद्ध महोत्सव और नागलवाड़ी महोत्सव इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान को और अधिक सशक्त बनाएंगे।