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MP के सरकारी कॉलेजों में 949 असिस्टेंट प्रोफेसरों की भर्ती, उच्च शिक्षा विभाग ने खोले नौकरी के दरवाजे

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मध्य प्रदेश के सरकारी कॉलेजों में पढ़ने वाले लाखों छात्रों और उच्च शिक्षा क्षेत्र में नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। Madhya Pradesh Public Service Commission ने उच्च शिक्षा विभाग के अंतर्गत 949 असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर भर्ती के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। लंबे समय से रिक्त पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू होने से कॉलेजों में शिक्षकों की कमी दूर होने की उम्मीद बढ़ गई है।

वर्षों से खाली पदों पर होगी नियुक्ति

उच्च शिक्षा विभाग के सरकारी महाविद्यालयों में कई वर्षों से बड़ी संख्या में शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं। हाल ही में मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदरसिंह परमार ने भर्ती प्रक्रिया को मंजूरी दी थी, जिसके बाद लोक सेवा आयोग ने आधिकारिक अधिसूचना जारी की है।यह भर्ती स्थायी और गजेटेड सेकंड क्लास पदों के लिए होगी। चयनित अभ्यर्थियों को सरकारी सेवा के साथ आकर्षक वेतनमान और करियर स्थिरता का लाभ मिलेगा।

किन अभ्यर्थियों को मिलेगा मौका

अधिसूचना के अनुसार संबंधित विषय में मास्टर डिग्री, नेट/सेट अथवा पीएचडी योग्यता रखने वाले उम्मीदवार आवेदन कर सकेंगे। चयन प्रक्रिया में लिखित परीक्षा सहित आयोग द्वारा निर्धारित अन्य चरण शामिल होंगे।

इन विषयों में सबसे ज्यादा पद

उच्च शिक्षा विभाग ने कला, वाणिज्य और विज्ञान संकाय के विभिन्न विषयों में रिक्तियां निकाली हैं। इनमें भौतिकी, रसायन विज्ञान, वाणिज्य, अर्थशास्त्र, इतिहास और भूगोल जैसे विषयों में सबसे अधिक पद हैं।

विषय

पद

रसायन विज्ञान

160

भौतिकी

145

वाणिज्य

94

अर्थशास्त्र

84

इतिहास

77

भूगोल

74

राजनीति विज्ञान

62

हिंदी

57

अंग्रेजी

56

समाजशास्त्र

49

संस्कृत

34

विधि

29

मनोविज्ञान

18

भूविज्ञान

8

योग विज्ञान

2

वर्गवार रिक्तियों का ब्योरा

कुल 949 पदों में विभिन्न वर्गों के लिए आरक्षण के अनुसार पद निर्धारित किए गए हैं।

वर्ग

पद

सामान्य

281

अनुसूचित जाति

171

अनुसूचित जनजाति

189

अन्य पिछड़ा वर्ग

263

आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग

88

कॉलेजों में सुधरेगी पढ़ाई की गुणवत्ता

लंबे समय से शिक्षकों की कमी से जूझ रहे सरकारी कॉलेजों को इस भर्ती से बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि नए असिस्टेंट प्रोफेसरों की नियुक्ति से न केवल विद्यार्थियों को बेहतर अकादमिक मार्गदर्शन मिलेगा, बल्कि उच्च शिक्षा संस्थानों में शोध और शिक्षण की गुणवत्ता भी मजबूत होगी।