बरगी हादसे से मिली सीख, जबलपुर के छात्रों ने बनाई AI तकनीक वाली ‘कभी न डूबने वाली’ बोट
बरगी बांध में हुए क्रूज हादसे के बाद जबलपुर के शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों ने एक अनोखा प्रोटोटाइप तैयार किया है। छात्रों का दावा है कि उनकी डिजाइन की गई मोटर बोट किसी भी आपात स्थिति में डूबेगी नहीं। इस बोट में आधुनिक सेंसर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है, जिससे खराब मौसम और तकनीकी गड़बड़ियों की पहले ही जानकारी मिल जाएगी।
डबल हल डिजाइन से बढ़ाई गई सुरक्षा
यह प्रोटोटाइप विशेषज्ञों की निगरानी में तैयार किया गया है, जो भविष्य में देश के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है। मैकेनिकल विभाग के थर्ड ईयर छात्र मंशू चौकसे ने बताया कि बोट को सिंगल हल की बजाय डबल हल डिजाइन में तैयार किया गया है। पानी के भीतर रहने वाले हिस्से को अधिक चौड़ा और स्थिर बनाया गया है, जिससे बोट के डूबने की संभावना न के बराबर है।उन्होंने बताया कि फिलहाल प्रोटोटाइप थर्माकोल से तैयार किया गया है, जबकि वास्तविक बोट के निर्माण में हल्की धातु, लकड़ी या अन्य हल्के पदार्थों का उपयोग किया जाएगा।
AI और सेंसर से होगी लगातार निगरानी
टीम के सदस्य अदनान पाटनवाला ने बताया कि बोट में विशेष सेंसर लगाए गए हैं, जो इंजन के वाइब्रेशन और बोट की स्थिति की लगातार मॉनिटरिंग करेंगे। मौसम खराब होने या इंजन में किसी तकनीकी समस्या आने पर सेंसर तुरंत असामान्य रीडिंग देंगे। यह पूरा सिस्टम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित होगा, जिससे बाहर से ही बोट की स्थिति का पता लगाया जा सकेगा। छात्र संस्कार चौरसिया ने बताया कि इस बोट में इंजन नीचे पानी में नहीं लगाया गया है, बल्कि इसे ऊपरी हिस्से में फिट किया गया है। इंजन हवा में थ्रस्ट पैदा करेगा, जिससे बोट आगे बढ़ेगी। उनके अनुसार, पानी के अंदर चलने वाले पारंपरिक प्रोपेलर की तुलना में यह तकनीक कम ऊर्जा में बेहतर संचालन दे सकती है।
विशेषज्ञों की निगरानी में तैयार हुआ मॉडल
इस प्रोजेक्ट का मार्गदर्शन कर रहे डॉ. सुमित राय ने बताया कि बरगी क्रूज हादसे की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए इस मॉडल को तैयार किया गया है। उन्होंने दावा किया कि किसी भी परिस्थिति में यह बोट डूबेगी नहीं। यदि इंजन बंद भी हो जाए, तो बोट पानी में तैरती रहेगी और लहरों के साथ आगे बढ़ सकती है।मैकेनिकल विभाग के प्रोफेसर डॉ. प्रदीप कुमार ने बताया कि भविष्य में इस मॉडल में रिन्यूएबल एनर्जी का उपयोग करने की भी योजना है, ताकि पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम की जा सके।