इंदौर में महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संच

2.8 करोड़ की वैध कमाई, 11 करोड़ की संपत्ति का हिसाब नहीं; अफसर ने बताया पत्नी की सिलाई-बुनाई से हुई आय

Indore News

इंदौर। शहर में लोकायुक्त की कार्रवाई ने एक बार फिर सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार के आरोपों को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त संचालक लक्ष्मीनारायण कंडवाल के कई ठिकानों पर छापेमारी के दौरान करोड़ों रुपये की संपत्ति का खुलासा हुआ है। जांच की शुरुआती तस्वीर में जहां संपत्ति का आंकड़ा करीब 9.5 करोड़ रुपये बताया गया था, वहीं दस्तावेजों और संपत्तियों की पड़ताल आगे बढ़ने के साथ यह राशि 11 करोड़ रुपये के करीब पहुंच गई है।

सबसे ज्यादा चर्चा उस दावे की हो रही है, जिसमें आय और संपत्ति के अंतर को लेकर पूछे गए सवालों के जवाब में अधिकारी ने परिवार की अतिरिक्त कमाई का स्रोत पत्नी की सिलाई-बुनाई को बताया है।

आय से चार गुना ज्यादा संपत्ति का दावा

लोकायुक्त जांच में सामने आया है कि लक्ष्मीनारायण कंडवाल की कुल ज्ञात वैध आय करीब 2.8 करोड़ रुपये है। इसमें नौकरी के दौरान प्राप्त लगभग 2.5 करोड़ रुपये का वेतन और करीब 30 लाख रुपये की कृषि आय शामिल है। इसके विपरीत जांच एजेंसियों को अब तक कंडवाल और उनके परिवार से जुड़ी करीब 10.83 करोड़ रुपये की चल और अचल संपत्ति की जानकारी मिली है। अधिकारियों के अनुसार यह राशि उनकी वैध आय से कई गुना अधिक है। लोकायुक्त का कहना है कि आय और खर्च के बीच बड़ा अंतर जांच का प्रमुख आधार बना हुआ है।

पत्नी की कमाई को बताया संपत्ति का स्रोत

पूछताछ के दौरान जब संपत्ति के स्रोत को लेकर सवाल किए गए तो कंडवाल ने दावा किया कि उनकी पत्नी वर्षों से सिलाई और बुनाई का काम करती हैं और परिवार की आय में उनका भी बड़ा योगदान रहा है। लोकायुक्त अधिकारियों ने इस दावे को गंभीरता से लेते हुए संबंधित दस्तावेजों की जांच शुरू कर दी है। अब उनकी पत्नी के आयकर रिटर्न, बैंक खातों और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल की जाएगी। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परिवार की वास्तविक आय के स्रोत क्या रहे हैं और क्या प्रस्तुत दावे उपलब्ध रिकॉर्ड से मेल खाते हैं।

छापे में क्या-क्या मिला

लोकायुक्त टीम ने अधिकारी के आवास, जिम और डिपार्टमेंटल स्टोर सहित कई ठिकानों पर एक साथ कार्रवाई की। जांच में घर से बरामद सामान की कीमत करीब 38.49 लाख रुपये आंकी गई है। बैंक लॉकर से मिले सोने-चांदी के आभूषणों का मूल्य लगभग 24.76 लाख रुपये बताया गया है। इसके अलावा आवास से करीब 4.89 लाख रुपये के अन्य गहने भी मिले हैं। अधिकारियों ने इन सभी संपत्तियों का अलग-अलग मूल्यांकन शुरू कर दिया है।

जिम और स्टोर भी जांच के घेरे में

जांच के दौरान जिस डिपार्टमेंटल स्टोर का पता चला, उसमें रखे सामान की कीमत करीब 35.73 लाख रुपये आंकी गई है। वहीं जिम में मौजूद उपकरणों और अन्य सामग्री का मूल्य लगभग 2.71 लाख रुपये बताया गया है। जानकारी के अनुसार डिपार्टमेंटल स्टोर का संचालन कंडवाल के दोनों बेटे करते हैं। वहीं जिम से परिवार को हर महीने लगभग 1.25 लाख रुपये किराए के रूप में प्राप्त होने की बात सामने आई है। इन व्यवसायों से जुड़े वित्तीय रिकॉर्ड भी अब जांच एजेंसियों के दायरे में हैं।

बैंक खातों पर लगी रोक

लोकायुक्त ने कार्रवाई के बाद कंडवाल और उनके परिवार से जुड़े बैंक खातों में होने वाले लेन-देन पर रोक लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बैंकों से विस्तृत जानकारी मिलने के बाद संपत्ति, निवेश और नकदी प्रवाह का विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा। अधिकारियों का मानना है कि इससे संपत्ति के वास्तविक स्रोतों की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

रिटायरमेंट से पहले बढ़ीं मुश्किलें

लक्ष्मीनारायण कंडवाल अगले करीब छह महीनों में सेवानिवृत्त होने वाले हैं। ऐसे समय में उनके खिलाफ दर्ज यह मामला प्रशासनिक और कानूनी दोनों स्तरों पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लोकायुक्त ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। फिलहाल जांच जारी है और आने वाले दिनों में वित्तीय दस्तावेजों की जांच के आधार पर नए खुलासे सामने आ सकते हैं।