इंदौर में NEET-2026 के कथित पेपर लीक के नाम पर छात

NEET अभ्यर्थियों को पेपर लीक का झांसा, Instagram पर फर्जी प्रश्नपत्र बेचने वाला गिरफ्तार

Crime News

इंदौर। देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-2026 से पहले पेपर लीक की अफवाह फैलाकर छात्रों को गुमराह करने का मामला इंदौर में सामने आया है। पुलिस ने एक युवक को गिरफ्तार किया है, जिस पर सोशल मीडिया के जरिए फर्जी प्रश्नपत्र बेचने का आरोप है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि आरोपी ने वास्तविक पेपर नहीं, बल्कि ChatGPT की मदद से तैयार किया गया प्रश्नपत्र छात्रों को बेचकर कमाई की।

मामला केवल फर्जी पेपर बेचने तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा रही हैं कि कहीं इसके पीछे बड़ा नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था। क्योंकि आरोपी ने देशभर के अभ्यर्थियों तक पहुंच बनाने के लिए सोशल मीडिया का सुनियोजित इस्तेमाल किया था।

Instagram बना फर्जी पेपर बेचने का जरिया

पुलिस के मुताबिक लसूड़िया निवासी अक्षय मालवीय ने परीक्षा से पहले Instagram पर रील और पोस्ट के माध्यम से दावा किया कि उसके पास NEET-2026 का प्रश्नपत्र उपलब्ध है। इस प्रचार के बाद विभिन्न राज्यों के 200 से अधिक छात्रों ने उससे संपर्क किया। आरोपी ने प्रति छात्र 100 से 200 रुपये लेकर कथित प्रश्नपत्र उपलब्ध कराया।

ChatGPT से तैयार किया गया प्रश्नपत्र

पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि उसके पास परीक्षा का कोई वास्तविक प्रश्नपत्र नहीं था। उसने ChatGPT की सहायता से संभावित सवालों का सेट तैयार किया और उसे लीक पेपर बताकर छात्रों को बेच दिया। इस खुलासे के बाद मामला पेपर लीक से ज्यादा साइबर ठगी और फर्जीवाड़े का रूप ले चुका है।

कोटा से मिला इनपुट, इंदौर में हुई गिरफ्तारी

जांच की शुरुआत राजस्थान के कोटा से हुई शिकायत के बाद हुई। एक छात्र ने कथित पेपर लीक से जुड़ी जानकारी एजेंसियों तक पहुंचाई थी। इसके बाद विभिन्न खुफिया एजेंसियों और साइबर निगरानी तंत्र ने जानकारी साझा की। कोटा पुलिस के ई-मेल के आधार पर इंदौर पुलिस की एसआईटी सक्रिय हुई और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।

बैंक खाते और मोबाइल की हो रही जांच

पुलिस आरोपी के बैंक खातों की पड़ताल कर रही है। शुरुआती जांच में खाते में करीब 25 हजार रुपये मिलने की जानकारी सामने आई है। अब ट्रांजेक्शन हिस्ट्री खंगाली जा रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने छात्रों ने भुगतान किया था। साथ ही मोबाइल डेटा और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।

परीक्षाओं के नाम पर बढ़ रहे डिजिटल फ्रॉड

यह मामला दिखाता है कि प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान छात्रों की चिंता और दबाव का फायदा उठाकर ठगी के नए तरीके अपनाए जा रहे हैं। पुलिस का मानना है कि ऐसे मामलों में केवल पैसे का नुकसान नहीं होता, बल्कि अभ्यर्थियों के बीच भ्रम और अविश्वास का माहौल भी बनता है। इसलिए जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आरोपी अकेले काम कर रहा था या उसके साथ अन्य लोग भी जुड़े हुए थे।