भोपाल: सरकारी स्कूल में बदबूदार गंदा पानी, जांच करने वाले अफसर ही नदारद
हबीबिया स्कूल का पानी लेकर जल सुनवाई पहुंचे कांग्रेस नेता
राजधानी भोपाल में सरकारी स्कूलों तक पहुंच रहा पानी कितना सुरक्षित है, इसका अंदाजा हबीबिया स्कूल के हालात से लगाया जा सकता है। यहां बच्चों को बदबूदार और दूषित पानी सप्लाई किए जाने का आरोप सामने आया है। हैरानी की बात यह रही कि जब इस पानी का सैंपल लेकर जांच कराने कांग्रेस नेता नगर निगम की जल सुनवाई में पहुंचे, तो मौके पर जांच करने वाले जिम्मेदार अफसर ही मौजूद नहीं थे।
मामला वार्ड क्रमांक 85 का है, जहां मंगलवार को जल सुनवाई आयोजित की गई थी। इसी दौरान हबीबिया स्कूल में गंदा पानी सप्लाई होने की शिकायत मिली। शिकायत मिलते ही कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला पानी का सैंपल लेकर वार्ड कार्यालय पहुंचे, लेकिन वहां न तो वार्ड प्रभारी मिले और न ही जोनल अधिकारी। पूरे कार्यालय में केवल एक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी मौजूद था।
सैंपल लिया, जांच से किया इनकार
कांग्रेस नेताओं ने जब दूषित पानी का सैंपल देकर मौके पर जांच की मांग की, तो मौजूद कर्मचारी ने साफ कह दिया कि जल सुनवाई में केवल सैंपल लेने की व्यवस्था है, जांच नहीं होती। जांच के लिए सैंपल को लैब भेजा जाएगा और रिपोर्ट बाद में आएगी।यहीं से सवाल खड़े हो गए। कांग्रेस नेता मनोज शुक्ला ने आरोप लगाया कि जल सुनवाई सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है। न जिम्मेदार अधिकारी मौके पर रहते हैं, न ही तुरंत जांच की कोई व्यवस्था है, जबकि मामला बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़ा हुआ है।
4000 सैंपल, लेकिन रिपोर्ट सिर्फ 3 की
नगर निगम ने अब तक भोपाल में चार हजार से अधिक पानी के सैंपल लिए हैं, लेकिन तीन स्थानों को छोड़कर किसी भी सैंपल की रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। हबीबिया स्कूल में कक्षा पहली से आठवीं तक करीब 350 से ज्यादा बच्चे रोज पढ़ने आते हैं। ऐसे में दूषित पानी पीने से उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है, लेकिन निगम की तरफ से इस ओर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही।
मौके पर टीडीएस जांच की मांग
मनोज शुक्ला ने मौके पर ही टीडीएस मीटर से पानी की गुणवत्ता जांचने की मांग की। स्थानीय लोगों ने भी पानी को पीने योग्य नहीं बताया। शुक्ला ने आरोप लगाया कि इंदौर में गंदा पानी पीने से अब तक 34 लोगों की मौत हो चुकी है, इसके बावजूद भोपाल नगर निगम सबक नहीं ले रहा.उन्होंने नगर निगम आयुक्त से सीधे हस्तक्षेप कर मामले में तत्काल और ठोस कार्रवाई की मांग की।