दिल्ली दंगा मामले में कड़कड़डूमा कोर्ट ने पूर्व पा

दिल्ली दंगा केस में बड़ा फैसला, IB अधिकारी अंकित शर्मा हत्याकांड में AAP नेता ताहिर हुसैन दोषी

Delhi Riots Case Big Decision

नई दिल्ली। दिल्ली के 2020 दंगा मामलों में सबसे चर्चित मामलों में से एक पर कड़कड़डूमा कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को हत्या और आपराधिक साजिश का दोषी करार दिया है। इस फैसले के साथ छह साल पुराने मामले में न्यायिक प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण चरण तक पहुंच गई है।

कोर्ट के इस निर्णय के बाद अब अगला चरण दोषियों की सजा तय करने का होगा। अभियोजन पक्ष लंबे समय से ताहिर हुसैन को इस वारदात का मुख्य आरोपी बताता रहा है। वहीं, यह मामला 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों का सबसे संवेदनशील और चर्चित केस माना जाता है।

कोर्ट ने किन आरोपों में दोषी ठहराया

कड़कड़डूमा कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण कुमार ने सुनवाई पूरी होने के बाद ताहिर हुसैन को हत्या और आपराधिक साजिश के आरोप में दोषी ठहराया। इस मामले में ताहिर हुसैन समेत कुल 11 लोगों को आरोपी बनाया गया था। मार्च 2023 में अदालत ने सभी आरोपियों के खिलाफ हत्या, दंगा और धार्मिक विद्वेष फैलाने सहित विभिन्न गंभीर धाराओं में आरोप तय किए थे।

क्या था अंकित शर्मा हत्याकांड

फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में सांप्रदायिक हिंसा के दौरान आईबी अधिकारी अंकित शर्मा लापता हो गए थे। अगले दिन उनका शव चांद बाग पुलिया के पास स्थित नाले से बरामद हुआ था। शव पर कई गंभीर चोटों के निशान मिले थे। इस घटना के बाद अंकित शर्मा के पिता रविंद्र कुमार की शिकायत पर दयालपुर थाने में ताहिर हुसैन और अन्य आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी।

अभियोजन पक्ष ने क्या दलील दी

अभियोजन के अनुसार, दंगों के दौरान हिंसक भीड़ को उकसाने और पूरी साजिश को अंजाम देने में ताहिर हुसैन की प्रमुख भूमिका रही। इसी आधार पर अदालत के समक्ष हत्या और आपराधिक साजिश सहित अन्य आरोपों को लेकर साक्ष्य पेश किए गए, जिन पर सुनवाई के बाद अदालत ने दोषसिद्धि का फैसला सुनाया।

अब आगे क्या होगा

दोषसिद्धि के बाद अदालत अब सजा की अवधि तय करने की प्रक्रिया शुरू करेगी। इस चरण में अभियोजन और बचाव पक्ष सजा के संबंध में अपनी-अपनी दलीलें रखेंगे। इसके बाद अदालत यह तय करेगी कि दोषी ठहराए गए आरोपियों को किस अवधि की सजा दी जाएगी।