योगी आदित्यनाथ का बयान: भारत की धरती धर्मशाला नहीं, रामकथा में सख्त संदेश
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के लखनऊ में आयोजित श्री राम कथा महोत्सव के समापन पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों के मन में देश के प्रति आस्था और सम्मान नहीं है, उनके लिए भारत की धरती को “धर्मशाला” की तरह नहीं देखा जा सकता। यह बयान रामकथा के मंच से सामने आया, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
रामभद्राचार्य की रामकथा के समापन में हुआ आयोजन
यह कार्यक्रम जगद्गुरु रामभद्राचार्य द्वारा आयोजित नौ दिवसीय श्री राम कथा महोत्सव का समापन था। योगी आदित्यनाथ ने राम के आदर्शों को देश की एकता का आधार बताते हुए कहा कि राम केवल आस्था नहीं, बल्कि जीवन मूल्यों की प्रेरणा हैं, जो पूरे देश को जोड़ते हैं।
समाज, आस्था और व्यवस्था पर टिप्पणी
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में समाज को विभाजित करने वाली ताकतों पर भी बात की। उन्होंने कहा कि जाति, भाषा और क्षेत्र के नाम पर समाज को तोड़ने की कोशिशें होती हैं, लेकिन संत परंपरा हमेशा एकजुटता का संदेश देती है। उन्होंने यह भी कहा कि रामकथा सिर्फ सुनने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में उतारने के लिए होती है।
लव जिहाद और लैंड जिहाद पर सख्त रुख
अपने भाषण में सीएम योगी ने लव जिहाद, धर्मांतरण और “लैंड जिहाद” जैसे मुद्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि इनसे जुड़े मामलों को लेकर जनजागरूकता जरूरी है और प्रशासन को भी सतर्क रहना होगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि सरकार इस दिशा में पहले से कानून और सख्त कदम उठा चुकी है।
राम के आदर्श और राष्ट्र की एकता का संदेश
योगी आदित्यनाथ ने रामायण के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान राम के आदर्श उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक भारत को जोड़ते हैं। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति राम के मार्ग पर चलता है, उसका जीवन सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ता है। साथ ही उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन और संतों की भूमिका का भी उल्लेख किया और कहा कि यह केवल धार्मिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक आंदोलन था, जिसने समाज को दिशा दी।