छत्तीसगढ़ के धमतरी में हल्दी उत्पादन को बढ़ावा देन

छत्तीसगढ़ में 'पीली क्रांति' की शुरुआत, धमतरी बनेगा हल्दी उत्पादन का नया हब; किसानों की आय बढ़ाने की बड़ी पहल

छत्तीसगढ़ में कृषि क्षेत्र में एक नई पहल की शुरुआत हुई है। आदिवासी बहुल धमतरी जिले के नगरी विकासखंड को हल्दी उत्पादन का बड़ा केंद्र बनाने की दिशा में काम शुरू हो गया है। कृषि विविधीकरण और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से शुरू की गई इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत किसानों को केवल हल्दी की खेती ही नहीं, बल्कि प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और मार्केटिंग से भी जोड़ा जाएगा, ताकि उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सके।

250 किसानों ने शुरू की नई खेती

परियोजना के पहले चरण में नगरी और मगरलोड विकासखंड के 250 किसानों ने करीब 10 टन उच्च गुणवत्ता वाले हल्दी बीज (राइजोम) की बुवाई की है। प्रशासन ने अगले सीजन में 250 टन हल्दी उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। इसके लिए किसानों को आधुनिक कृषि तकनीकों, गुणवत्तापूर्ण बीज और वैज्ञानिक खेती के तरीके अपनाने का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

खेती से बाजार तक मिलेगा पूरा सहयोग

इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि किसानों को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखा जाएगा। उन्हें पूरी वैल्यू चेन से जोड़ा जाएगा, जिसमें—

  • हल्दी का वैज्ञानिक उत्पादन

  • प्रोसेसिंग

  • पैकेजिंग

  • ब्रांडिंग

  • मार्केटिंग

शामिल है। इससे किसानों की बिचौलियों पर निर्भरता कम होगी और उन्हें अपनी उपज का बेहतर दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी।

आदिवासी किसानों की आय बढ़ाने पर फोकस

धमतरी का नगरी क्षेत्र आदिवासी बहुल इलाका है। ऐसे में इस परियोजना का उद्देश्य केवल नई फसल को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि वनांचल के किसानों की आय में स्थायी वृद्धि सुनिश्चित करना भी है। प्रशासन का मानना है कि हल्दी जैसी नकदी फसल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

इन संस्थाओं की साझेदारी से चल रही परियोजना

यह अभियान जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में संचालित किया जा रहा है। परियोजना के क्रियान्वयन में जिला पंचायत धमतरी जनपद पंचायत नगरी 'प्रदान' संस्था की महत्वपूर्ण भूमिका है। सभी संस्थाएं मिलकर किसानों को तकनीकी सहायता, प्रशिक्षण और बाजार से जोड़ने का काम कर रही हैं।

क्यों अहम है यह पहल?

भारत दुनिया के प्रमुख हल्दी उत्पादक देशों में शामिल है। ऐसे में धमतरी में वैज्ञानिक तरीके से हल्दी उत्पादन बढ़ने से न केवल स्थानीय किसानों की आमदनी बढ़ सकती है, बल्कि भविष्य में यह क्षेत्र छत्तीसगढ़ के प्रमुख मसाला उत्पादन केंद्र के रूप में भी पहचान बना सकता है।