छत्तीसगढ़ में कांग्रेस नेताओं और धर्म संतों के बीच

छत्तीसगढ़ में धर्म और राजनीति की जुबानी जंग तेज, बघेल के बयान पर संत समाज और BJP आमने-सामने

रायपुर। छत्तीसगढ़ में इन दिनों राजनीति और धर्म के बीच बयानबाजी ने माहौल गर्म कर दिया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और प्रमुख धार्मिक संतों के बीच जारी जुबानी टकराव अब सार्वजनिक बहस का बड़ा मुद्दा बन गया है। बयान सिर्फ सियासत तक सीमित नहीं रहे, बल्कि धार्मिक भावनाओं और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक पहुंच गए हैं।

भूपेश बघेल के बयान से शुरू हुआ नया विवाद

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजीजू को लेकर बयान दिया कि वे गौमांस खाते हैं और फिर भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें मंत्रिमंडल में शामिल किया हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या जगद्गुरु रामभद्राचार्य इसे सही मानते हैं। इसी के साथ उन्होंने पं. धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री पर भी तंज कसते हुए कहा कि उनके चेले से कहिए कि पेट्रोल-डीजल कम करने की पर्ची निकाल दें। इन बयानों ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है, जहां सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही एक-दूसरे पर तीखे हमले कर रहे हैं।

संत समाज और नेताओं के बीच बढ़ता टकराव

इस पूरे विवाद में नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत के पुराने बयान भी चर्चा में हैं। उन्होंने जगद्गुरु रामभद्राचार्य को लेकर कहा था कि वे उन्हें जगद्गुरु नहीं मानते और भाजपा के प्रचारक के रूप में देखते हैं। इससे पहले भूपेश बघेल भी धीरेन्द्र शास्त्री को भाजपा से जुड़ा एजेंट बता चुके हैं। दूसरी ओर कोरबा सांसद ज्योत्सना महंत ने भी यह स्पष्ट कहा था कि धर्म के नाम पर राजनीति नहीं होनी चाहिए और जनप्रतिनिधियों को सेवा भाव पर ध्यान देना चाहिए।

रामभद्राचार्य का पलटवार और सख्त रुख

चिरमिरी में रामकथा के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने इन बयानों पर कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा कि उनके जगद्गुरुत्व को चुनौती देने वालों को यह स्वीकार नहीं होगा। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्हें सभी अखाड़ों और संत समाज की मान्यता प्राप्त है और वे 22 भाषाओं में प्रवाहपूर्ण रूप से बोल सकते हैं। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि राम से प्रेम करने वालों को लेकर विरोध करना अनुचित है और ऐसे लोगों को जनता समझती है।

धर्म कथाओं से शुरू हुआ राजनीतिक विवाद

यह विवाद नया नहीं है। वर्ष 2025 में भिलाई में आयोजित एक कथा के दौरान भी भूपेश बघेल और धीरेन्द्र शास्त्री के बीच तीखी बयानबाजी हुई थी। उस समय बघेल ने अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया था, जबकि शास्त्री ने मंच से प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि रामभक्तों को रोकने वाले लोग देश छोड़ दें। इसके जवाब में बघेल ने यह भी कहा था कि वे हनुमान चालीसा लंबे समय से पढ़ते आ रहे हैं और किसी भी तरह के राजनीतिक एजेंडे से प्रभावित नहीं हैं।

मोदी और आर्थिक नीतियों पर भी तंज

इसी राजनीतिक माहौल के बीच भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि पीएम जनता को बचत की सलाह देते हैं, जबकि खुद लगातार विदेश दौरों पर रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के आर्थिक फैसलों और बड़े कॉरपोरेट निवेशों पर सवाल उठते रहेंगे। छत्तीसगढ़ में यह पूरा घटनाक्रम अब केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धार्मिक प्रभाव और सामाजिक भावनाओं के बीच एक बड़ा टकराव बनता दिख रहा है।