CG News: भिलाई BSP में करोड़ों की लोहा चोरी केस में CBI की एंट्री, जांच ने पकड़ी रफ्तार
भिलाई। छत्तीसगढ़ के भिलाई जिले में स्थित भिलाई इस्पात संयंत्र में करोड़ों रुपये के कथित लोहा चोरी मामले की जांच अब नए चरण में पहुंच गई है। रविवार को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की टीम के संयंत्र पहुंचने की सूचना के बाद पूरे प्रशासनिक तंत्र में हलचल मच गई। बताया जा रहा है कि करीब 10 सदस्यीय टीम ने प्लांट के कई विभागों में जाकर शुरुआती स्तर पर दस्तावेजों और रिकॉर्ड की पड़ताल की।
हालांकि CBI की ओर से जांच को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन टीम की मौजूदगी ने इस मामले को और गंभीर बना दिया है। इससे पहले जिला पुलिस और अन्य एजेंसियां इस प्रकरण की जांच कर रही थीं।
प्लेट मिल और SMS-3 विभाग में जुटाए गए रिकॉर्ड
सूत्रों के मुताबिक CBI की टीम ने प्लेट मिल और स्टील मेल्टिंग शॉप (SMS-3) से जुड़े दस्तावेजों की जांच की। उत्पादन, सामग्री निर्गमन, स्क्रैप प्रबंधन और रिकॉर्ड संधारण से जुड़े कागजात की भी पड़ताल की गई। बताया जा रहा है कि कुछ अधिकारियों और कर्मचारियों से भी प्रारंभिक स्तर पर जानकारी ली गई। हालांकि इस संबंध में न तो CBI और न ही BSP प्रबंधन ने आधिकारिक पुष्टि की है।
पहले ही हो चुकी है गिरफ्तारी और निलंबन
मामले में BSP प्रबंधन अपनी आंतरिक जांच के आधार पर SMS-3 के महाप्रबंधक हिमांशु भूषण मलिक और कर्मचारी मनोज कुमार देवांगन को निलंबित कर चुका है। इसके अगले दिन जिला पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार भी किया था। जांच एजेंसियों का दावा है कि पूछताछ और दस्तावेजों के आधार पर कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। इन्हीं इनपुट के आधार पर जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।
विधायक पहले से उठा रहे थे मामला
भिलाई इस्पात संयंत्र से कथित लोहा चोरी का मुद्दा राजनीतिक स्तर पर भी लगातार उठता रहा है। वैशाली नगर से भाजपा विधायक रिकेश सेन कई बार इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग कर चुके हैं। CBI टीम के संयंत्र पहुंचने की खबर के बाद इस मामले को उसी मांग से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि केंद्रीय एजेंसी ने अब तक औपचारिक रूप से जांच अपने हाथ में लेने की घोषणा नहीं की है।
आगे और बढ़ सकता है जांच का दायरा
जिला पुलिस फिलहाल गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है और कई पहलुओं की जांच जारी है। वहीं CBI की मौजूदगी के बाद संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में जांच और व्यापक हो सकती है। यदि केंद्रीय एजेंसी औपचारिक रूप से इस मामले की जांच शुरू करती है तो लोहा चोरी नेटवर्क, जिम्मेदार अधिकारियों और कथित अनियमितताओं से जुड़े कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं।