भोपाल में 15 एकड़ गेहूं जला, ग्रामीणों ने दौड़कर बचाई सैकड़ों एकड़ फसल
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के एक गांव में शुक्रवार दोपहर अचानक आगजनी से भारी नुकसान हो गया। देखते ही देखते आग ने ऐसा रूप लिया कि देखते ही देखते गेहूं की खड़ी फसल राख में बदल गई। घटना जिले के कुठार गांव में हुई।
दरअसल, खेतों में तैयार खड़ी फसल में लगी इस आग ने करीब 15 एकड़ फसल को चपेट में ले लिया। आसपास सैकड़ों एकड़ में गेहूं की फसल थी, ऐसे में खतरा और बड़ा था। अगर आग फैल जाती तो नुकसान कई गुना बढ़ सकता था।
आग बुझाने के लिए खेतों में उतरे लोग
आग लगने की खबर फैलते ही गांव के लोग बिना देर किए खेतों की ओर दौड़ पड़े। करीब 50 से ज्यादा लोग आग बुझाने में जुट गए। किसी ने ट्रैक्टर-ट्रॉली से पानी लाना शुरू किया। वहीं कई लोग बाल्टी और पाइप के सहारे आग पर काबू पाने में लगा रहा। काफी मशक्कत के बाद आग को फैलने से रोका जा सका।
मौके पर पहुंचे जनप्रतिनिधि ने भी की मदद
जिला पंचायत उपाध्यक्ष मोहन सिंह जाट भी मौके पर पहुंचे और लोगों के साथ मिलकर आग बुझाने में जुटे नजर आए। उन्होंने बताया कि अगर समय रहते आग पर काबू नहीं पाया जाता, तो आसपास के 4-5 गांवों के किसानों की फसल भी खतरे में आ सकती थी।
आगजनी का कारण अभी साफ नहीं
स्थानीय लोगों के अनुसार, आग तेजी से फैल रही थी क्योंकि उस वक्त हवा काफी तेज चल रही थी। हालांकि, आग लगने की असली वजह अभी सामने नहीं आई है। प्रशासन मामले की जांच में जुटा हुआ है।
एक दिन पहले ही पराली जलाने पर लगी थी रोक
इस घटना से ठीक एक दिन पहले जिला प्रशासन ने बड़ा फैसला लेते हुए पराली (नरवाई) जलाने पर रोक लगा दी थी। एडीएम सुमित कुमार पांडेय ने आदेश जारी कर अगले 3 महीनों तक पूरे जिले में इस पर प्रतिबंध लागू कर दिया है। यह फैसला नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्देशों के तहत लिया गया है।
नियम तोड़ने पर होगी सख्त कार्रवाई
प्रशासन ने साफ किया है कि पराली जलाने पर एफआईआर दर्ज की जाएगी और कानूनी कार्रवाई भी होगी। सभी एसडीएम को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में सख्ती से निगरानी रखें। फिलहाल गेहूं की कटाई का समय है, ऐसे में कई जगह पराली जलाने के मामले सामने आते हैं, जो न सिर्फ आग का खतरा बढ़ाते हैं, बल्कि जमीन की उर्वरता को भी नुकसान पहुंचाते हैं।
जून तक लागू रहेगा आदेश
यह प्रतिबंध अगले तीन महीने यानी जून तक लागू रहेगा। आमतौर पर इस समय के बाद मानसून सक्रिय हो जाता है और ऐसे मामलों में कमी आ जाती है। प्रशासन ने साफ किया है कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कदम उठाए जाएंगे।