भोपाल स्लॉटर हाउस को फिर शुरू करने की चर्चा पर बजरंग दल का विरोध तेज
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बंद पड़े एक स्लॉटर हाउस को लेकर नया विवाद सामने आया है। बजरंग दल ने आरोप लगाया है कि जिस इकाई का नाम पहले गंभीर आरोपों के कारण चर्चा में रहा, उसी से दोबारा संचालन को लेकर अभिमत मांगा जा रहा है। संगठन ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए विरोध प्रदर्शन किया और मामले में पारदर्शिता की मांग की है।
विवाद की वजह जबलपुर हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद शुरू हुई प्रशासनिक प्रक्रिया बनी है। बजरंग दल का दावा है कि इस मामले में नगर निगम की ओर से अपनाया गया रुख कई सवाल खड़े करता है। वहीं प्रशासनिक स्तर पर अभी अंतिम निर्णय होना बाकी है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद बढ़ी हलचल
जानकारी के अनुसार LIVE STOCK FOOD PROCESSOR PVT LTD ने अपने स्लॉटर हाउस के पुनः संचालन को लेकर जबलपुर हाईकोर्ट का रुख किया था। संगठन का आरोप है कि सुनवाई के दौरान नगर निगम की ओर से याचिका पर कोई आपत्ति दर्ज नहीं कराई गई। इसके बाद अदालत ने मामले में संबंधित प्राधिकरण को नियमों के अनुसार निर्णय लेने की बात कही।
नगर निगम की प्रक्रिया पर उठे सवाल
बजरंग दल का कहना है कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम आयुक्त कार्यालय की ओर से संबंधित कंपनी से पुनः संचालन के संबंध में अभिमत मांगा गया है। संगठन का आरोप है कि इस कदम से ऐसा संदेश जा रहा है मानो स्लॉटर हाउस को फिर से शुरू करने की दिशा में प्रक्रिया आगे बढ़ रही हो। हालांकि प्रशासन की ओर से इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय सार्वजनिक नहीं किया गया है।
पुराने मामले का फिर हुआ जिक्र
विरोध प्रदर्शन के दौरान संगठन पदाधिकारियों ने उस पुराने मामले का भी उल्लेख किया, जिसमें संबंधित स्लॉटर हाउस पर गौवंश से जुड़े गंभीर आरोप लगे थे। बजरंग दल का कहना है कि जिन आरोपों के बाद इकाई बंद हुई थी, उन्हें देखते हुए उसके पुनः संचालन पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। संगठन ने पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा की मांग की है।
आंदोलन की चेतावनी
बजरंग दल के विभाग मंत्री जीवन शर्मा ने कहा कि जिस इकाई पर गोवंश वध जैसे आरोप लगे हों, उसे दोबारा संचालित करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। वहीं विभाग संयोजक अभिजीत सिंह राजपूत ने कहा कि यदि स्लॉटर हाउस को फिर से शुरू करने की दिशा में कोई कदम बढ़ाया गया तो संगठन व्यापक जनभागीदारी के साथ आंदोलन करेगा।
प्रशासनिक फैसले पर टिकी निगाहें
फिलहाल पूरे मामले में अंतिम फैसला नगर निगम प्रशासन को लेना है। इस बीच विवाद ने राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा तेज कर दी है। एक तरफ विरोध कर रहे संगठन हैं, तो दूसरी ओर कानूनी प्रक्रिया के तहत संबंधित पक्ष अपनी मांग रख रहा है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रशासन नियमों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर क्या निर्णय लेता है।