भोपाल और विदेश के बीच फंसी राजस्व विभाग की तबादला नीति
मध्य प्रदेश की चालू स्थानांतरण नीति राजस्व विभाग में प्रमुख सचिव की अनुपस्थिति के कारण अटक गई है। राजस्व मंत्री करण सिंह वर्मा के सामने इस समय एक असामान्य स्थिति बनी हुई है। विभाग के प्रमुख सचिव विवेक पोरवाल विदेश यात्रा पर हैं, जबकि प्रभारी प्रमुख सचिव के रूप में कार्यभार संभाल रहे अमित राठौर को नीतिगत निर्णय लेने का अधिकार प्राप्त नहीं है।
ऐसी स्थिति में राजस्व विभाग की स्थानांतरण प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। 10 जून तक आवेदन स्वीकार करने की अंतिम तिथि निर्धारित है, लेकिन विभागीय स्तर पर निर्णय लंबित हैं। परिणामस्वरूप मंत्री दो प्रमुख सचिवों के बीच प्रशासनिक उलझन में फंस गए हैं। मंत्री निवास से इस संबंध में केवल इतना जवाब मिला "अब मैं इसमें क्या कर सकता हूं?"
गाय-भैंस की लाइव ट्रैकिंग करेंगे मुख्य सचिव
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव प्रदेश में दुग्ध क्रांति के अपने संकल्प को अमलीजामा पहनाने की दिशा में आगे बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। इसी क्रम में अब प्रदेश में पहली बार गायों और भैंसों की सेहत तथा दूध उत्पादन की लाइव ट्रैकिंग की जाएगी।केंद्र सरकार की नेशनल डिजिटल लाइवस्टॉक मिशन योजना को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए राज्य सरकार ने एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के अनुसार इस समिति की अध्यक्षता मुख्य सचिव अनुराग जैन करेंगे।समिति में पशुपालन एवं डेयरी विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, सहकारिता विभाग तथा नगरीय प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिवों को शामिल किया गया है, जो इस अभियान के संचालन में सहयोग करेंगे।
कलेक्टरी में पिछड़े प्रदेश के आईएएस
भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) में चयनित होने के बाद अधिकांश अधिकारियों का सपना किसी जिले का कलेक्टर बनकर प्रशासनिक नेतृत्व संभालने का होता है। हालांकि, मध्य प्रदेश उन राज्यों में शामिल है जहां युवा आईएएस अधिकारियों को कलेक्टर बनने के लिए अन्य राज्यों की तुलना में अधिक इंतजार करना पड़ता है। प्रदेश में अब तक केवल वर्ष 2016 बैच के आईएएस अधिकारियों को ही जिलों की कमान मिल सकी है। इसके विपरीत कई अन्य राज्यों में तीन से चार वर्ष की सेवा पूरी कर चुके अधिकारियों को भी कलेक्टर बनाया जा चुका है। स्थिति यह है कि मध्य प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारियों को कलेक्टर बनने के लिए सात से नौ वर्षों तक प्रतीक्षा करनी पड़ रही है। प्रशासनिक हलकों में इसे कैडर प्रबंधन की चुनौती के रूप में देखा जा रहा है।
मंत्रालय में आईएफएस बनाम आईएएस
मंत्रालय में आईएफएस और आईएएस अधिकारियों के बीच चल रहा विवाद अब नए चरण में पहुंच गया है। प्रदेश के पूर्व आईएफएस अधिकारी आजाद सिंह डबास ने सेवा काल के दौरान जिन मामलों को उठाया था, वे अब सेवानिवृत्ति के बाद लोकायुक्त और आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ तक पहुंच गए हैं। बताया जाता है कि उनके द्वारा उठाई गई 35 फाइलों में कथित अनियमितताओं की जांच अभी प्रारंभ भी नहीं हो पाई थी कि अब एक और वरिष्ठ आईएफएस अधिकारी मोहन मीणा न्यायालय पहुंच गए हैं।हाल ही में 1994 बैच के आईएफएस अधिकारी मोहन मीणा ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट), जबलपुर में याचिका दायर की है। इस मामले में आईएएस अधिकारी अशोक बर्णवाल सहित सात अधिकारियों को नोटिस जारी किए गए हैं। याचिका में आरोप लगाया गया है कि जांच को जानबूझकर लंबित रखकर उन्हें पदोन्नति से वंचित किया गया।
सोम डिस्टिलरीज पर सीएस का वीटो
सोम डिस्टिलरीज प्रबंधन ने शायद यह अनुमान भी नहीं लगाया होगा कि उसे सरकार के भीतर इतनी जटिल परिस्थितियों का सामना करना पड़ेगा। कंपनी पहले ही कथित फर्जी हस्ताक्षरों के विवाद और न्यायालयी कार्यवाहियों के कारण दबाव में है। कंपनी को अपने बियर स्टॉक के माध्यम से राजस्व हानि की भरपाई की उम्मीद थी, लेकिन मुख्य सचिव कार्यालय से उसे झटका लगा है। सूत्रों के अनुसार कंपनी से जुड़ी एक महत्वपूर्ण फाइल को मंजूरी नहीं मिली और उसे निरस्त कर दिया गया। इस घटनाक्रम को प्रशासनिक गलियारों में कंपनी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।