भोपाल की मौलाना आज़ाद सेंट्रल लाइब्रेरी में दुर्लभ

मौलाना आज़ाद सेंट्रल लाइब्रेरी : दुर्लभ ग्रंथों का हो रहा डिजिटलीकरण, 250 नई पुस्तकें शामिल

MP News

भोपाल। विश्व पुस्तक एवं कॉपीराइट दिवस पर शासकीय मौलाना आज़ाद सेंट्रल लाइब्रेरी भोपाल में 250 नवीन साहित्यिक पुस्तकें मिली। बता दें कि प्रदेश की पहली 117 साल पुरानी इस आधुनिक शासकीय लाइब्रेरी में दुर्लभ ग्रंथों का डिजिटलीकरण युद्धस्तर पर जारी है। 

इस मौके पर कलेक्टर प्रियंक मिश्रा, जिला पंचायत सीईओ इला तिवारी ने पुस्तकालय का भ्रमण कर सदस्यता ग्रहण की और आम नागरिकों को भी जुडऩे का आह्वान किया। उन्होंने तकनीक, सेल्फ इश्यू-रिटर्न कियोस्क एवं ओपेक सिस्टम का अवलोकन किया। दोनों अधिकारियों ने करीबन एक घंटे समय बिताया। इस दौरान कलेक्टर मिश्रा स्वंय कुछ पुरानी किताबों का पठन किया। 

विशेष प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करें : कलेक्टर

कलेक्टर ने निर्देश देते हुए कहा कि यहां ट्रेनिंग सेंटर डेवलप की जाए। पुरानी पांडुलिपियों एवं गजेटियर को संरक्षित करने लाइब्रेरी में विशेष प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करें। पुस्तकालय से चयनित सदस्यों से मिलकर पुस्तकालय के विकास में सहयोग लें। राजा राममोहन राय लाइब्रेरी फाउंडेशन, कोलकाता से मिलने वाली योजनाओं से पुस्तकालय को जोड़ा जाए। 

कलेक्टर ने कहा कि रिसर्च प्लेटफॉर्म जैसे शोधगंगा, गंगोत्री आदि प्लेटफॉर्म पर इस लाइब्रेरी का रजिस्ट्रेशन कराएं, जिससे रिसर्च करने वाले छात्रों को डाटा मिल सके। लाइब्रेरी को नए उपकरणों से विकसित कर आधुनिक सुविधाएं बढ़ाई जाएं। इस अवसर पर जिला प्रशासन के अधिकारी के साथ पुस्तकालय क्षेत्रीय ग्रंथपाल रत्ना वाधवानी, मैनेजर रचित मालवीय उपस्थित रहे।

117 वर्ष साल पुरानी पुस्तकालय

बता दें कि शासकीय मौलाना आज़ाद सेंट्रल लाइब्रेरी वर्ष 1908 में स्थापित पुस्तकालय है, जोकि मध्यप्रदेश का सबसे पुराना एवं समृद्ध ज्ञान-केंद्र है। यहां 1 लाख से अधिक दुर्लभ पुस्तकें एवं पांडुलिपियां संरक्षित हैं। युवा-केंद्रित पहल के तहत प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए समर्पित स्टडी सर्किल एवं नि:शुल्क वाई-फाई सुविधा के साथ यह लाइब्रेरी युवाओं के लिए करियर हब बन रहा है।