क्या है किसानों की 11 बड़ी समस्याएं? भोपाल में गेहूं खरीदी से लेकर भ्रष्टाचार तक उठी आवाज
मध्यप्रदेश की राजधानी Bhopal में किसानों ने प्रशासन के सामने अपनी 11 प्रमुख समस्याएं रखी हैं। Bharatiya Kisan Sangh के बैनर तले किसानों ने गेहूं खरीदी में देरी, भ्रष्टाचार, मुआवजा और सरकारी योजनाओं के लाभ न मिलने जैसे मुद्दों को गंभीर बताते हुए समाधान की मांग की है किसानों का कहना है कि मौजूदा व्यवस्थाएं उन्हें राहत देने के बजाय और अधिक परेशान कर रही हैं। खासकर ऑनलाइन सिस्टम, भुगतान में देरी और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है।
गेहूं खरीदी में अव्यवस्था से बढ़ी परेशानी
किसानों ने बताया कि गेहूं उपार्जन के लिए स्लॉट बुकिंग में तकनीकी समस्याएं आ रही हैं।
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पोर्टल बार-बार फेल हो रहा है
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ओटीपी वेरिफिकेशन में दिक्कत
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तौल के बाद भी भुगतान अटका
इस वजह से कई किसान एमएसपी से कम कीमत पर फसल बेचने को मजबूर हो रहे हैं।
MSP और भावांतर योजना की मांग
किसानों ने मांग की है कि सभी फसलों की खरीदी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर सुनिश्चित की जाए, साथ ही, जिन किसानों को कम दाम पर फसल बेचनी पड़ी है, उन्हें भावांतर योजना का लाभ दिया जाए।
भूमि अधिग्रहण में उचित मुआवजा नहीं
पिपलानी से खजूरी कलां बायपास परियोजना में जमीन अधिग्रहण को लेकर भी किसान नाराज हैं, उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार बाजार मूल्य के चार गुना तक मुआवजा दिया जाना चाहिए, जो अभी नहीं मिल रहा है।
तहसील में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के आरोप
किसानों ने आरोप लगाया कि तहसील कार्यालयों में बिना लेन-देन के काम नहीं होता।
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दस्तावेजों में हेरफेर
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गलत सीमांकन
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प्रॉपर्टी डीलरों से मिलीभगत
इन कारणों से किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
फार्मर आईडी और रिकॉर्ड की समस्या
नई गाइडलाइन के अनुसार फार्मर आईडी अनिवार्य है, लेकिन रिकॉर्ड अपडेट नहीं, संयुक्त खातों में दिक्कत, परिमार्जन लंबित इस वजह से किसानों को खाद और सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
पीएम किसान योजना की किस्तें अटकी
PM Kisan Samman Nidhi Yojana के तहत कई पात्र किसानों को 6000 की राशि नहीं मिल रही है। किसानों ने लंबित किस्तें जल्द जारी करने की मांग की है।
ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश से नुकसान
फसल कटाई के समय बारिश और ओलावृष्टि से नुकसान बढ़ा है।किसानों ने फसल बीमा योजना में पारदर्शिता और समय पर मुआवजा देने की मांग की है।
शासकीय भूमि पर अतिक्रमण का मामला
कुछ मामलों में गलत सीमांकन और अतिक्रमण के आरोप भी सामने आए हैं। किसानों ने निष्पक्ष जांच और सीमांकन की मांग की है।
राजस्व मामलों में देरी
नामांतरण, बंटवारा और अन्य मामलों में 5-6 महीने तक कार्रवाई नहीं होती किसानों ने समय-सीमा तय करने की मांग की है। किसानों का आरोप है कि तहसील में दलालों के काम जल्दी हो जाते हैं, जबकि आम किसान को घंटों इंतजार करना पड़ता है।
बिजली व्यवस्था भी बनी समस्या
खेती के लिए पर्याप्त बिजली नहीं मिल रही है। किसानों ने तार और खंभों की मरम्मत बिलिंग व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई है।