प्रशासनिक सर्वे रिपोर्टं में बड़ा खुलासा! भोपाल में 3200 व्यावसायिक परिसरों के पास फायर NOC नहीं
भोपाल। राजधानी के अधिकांश बहुमंजिला आवासीय भवनों और व्यावसायिक परिसरों के पास वैध फायर एनओसी नहीं है। हाल ही में जारी प्रशासनिक सर्वे रिपोर्टं के अनुसार शहर में लगभग 3,200 होटलों और व्यावसायिक परिसरों के पास वैध फायर एनओसी उपलब्ध नहीं है और महज कुछ दर्जन संस्थान ही इसके नियमों का पालन कर रहे हैं।
नगर निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने कहा कि इस विधेयक के पारित होने के बाद जारी निर्देशों का राजधानी में सख्ती के साथ पालन करेंगे। हम नए सिरे से बहुमंजिला आवासीय भवनों और व्यावसायिक संस्थानों का सर्वे कर फायर एनओसी देंगे। इन भवनों में फायर सेफ्टी उपकरण है या नहीं, इसकी जांच करेंगे। अगर नहीं मिला, तो संबंधित भवन मालिक को उपकरण रखने के लिए कहा जाएगा।
बता दें कि पिछले तीन सालों से आगजनी की घटनाओं जैसे पीपुल्स हॉस्पिटल के सामने और अन्य क्षेत्रों में नगर निगम ने सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाया है। राष्ट्रीय भवन संहिता और मध्य प्रदेश अग्नि सुरक्षा नियमों के तहत 15 मीटर लगभग चार- पांच मंजिल से ज्यादा ऊंची इमारतों के लिए फायर एनओसी अनिवार्य है। भोपाल के अधिकांश बहुमंजिला भवनों और व्यावसायिक संस्थानों, यहां तक कि कोचिंग सेंटर्स में भी मानकों की अनदेखी के मामले सामने आए हैं, जिसके कारण निगम द्वारा कई कोचिंग संस्थानों को सील किया गया है। भवनों में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम जैसे फायर फाइटिंग सिस्टम, इमरजेंसी एग्जिट और स्प्रिंकलर आदि लगाना और उन्हें चालू रखना भवन मालिकों/निवासियों की जिम्मेदारी है।
विधानसभा में अग्नि सुरक्षा विधेयक पारित
मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में मंगलवार को अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवा विधेयक 2026 सर्वसम्मति से पारित हो गया। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के अनुसार इस पूरे एक्ट को धरातल पर लागू करने में करीब 6 महीने का समय लगेगा। इससे पहले विधेयक विधानसभा के पटल पर रखे जाने से पहले बिल के पारित होने से पहले सदन में जमकर चर्चा हुई। विपक्ष ने फायर स्टेशनों और कर्मचारियों की कमी को लेकर सरकार को घेरा।
विधेयक में ये हैं खास बिंदु
- अब शहरों में 15 मीटर से अधिक ऊंची इमारतों, बड़े स्कूलों, हॉस्टलों, अस्पतालों, मॉल और कमर्शियल कॉम्पलेक्स में अग्नि सुरक्षा के सख्त मानक लागू होंगे। नियमों का पालन न करने पर अफसरों पर दंडात्मक कार्रवाई होगी। - नए फायर सेफ्टी बिल में एनओसी अनिवार्य किया गया है। ऊंची इमारतों, मॉल्स और अस्पतालों जैसी बड़ी व्यावसायिक व आवासीय संपत्तियों के लिए फॉयर एनओसी लेना अनिवार्य कर दिया गया है। - भविष्य में जहां भी आगजनी की घटना होगी, वहां सबसे पहले ये देखा जाएगा कि इमारत में सेफ्टी मानक थे या नहीं। इन मानकों में लापरवाही मिली, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ सीधे दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। - अफसरों को न्यायिक अधिकार दिया गया है। आपदा और आगजनी के वक्त तुरंत राहत पहुंचाने के लिए फायर सेफ्टी अधिकारी जरूरत पडऩे पर रास्ते या बाधक को तुरंत तोड़ सकेंगे। - अग्नि सुरक्षा के लिए एक फोर्स और तकनीकी अधिकारियों की टीम बनेगी। यह 24 घंटे और सातो दिन काम करने वाली संस्था होगी। - मध्य प्रदेश में आधुनिक अग्निशमन उपकरण लाए जाएंगे। फायर एनओसी और सर्टिफिकेट जारी करने के लिए तय समय सीमा निर्धारित की जाएगी। - हर साल बहुमंजिले इमारतों का तीसरे पार्टी से जांच अनिवार्य कर दिया गया है। - पूरे मध्य प्रदेश की मैपिंग की जा रही है, जिससे यह तय किया जा सके कि नए फायर स्टेशन कहां-कहां खोले जाने की जरूरत है। - यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या शिकायत होती है तो उसके लिए एक निष्पक्ष अपील मंच भी बनाया जाएगा। - यह फोर्स सिर्फ आग ही नहीं बल्कि बाढ़ और अन्य प्राकृतिक आपदाओं में भी रेस्क्यू ऑपरेशन का काम करेगी।