'स्टार मेकर' के चक्कर में 35 लाख डुबाए, फिर बैंक से 42 लाख गायब, कैशियर की गिरफ्तारी से खुला राज
खरगोन। जिला सहकारी केंद्रीय बैंक की ठीबगांव शाखा में सामने आए करोड़ों के वित्तीय घोटाले ने बैंकिंग व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 42 लाख रुपये के गबन मामले में फरार चल रही महिला कैशियर ऋतु गोस्वामी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। खरगोन पुलिस की शुरुआती पूछताछ में एक चौंकाने वाला दावा सामने आया। आरोपी ने बताया कि गबन की गई रकम में से 35 लाख रुपये से ज्यादा ऑनलाइन गेम ‘स्टार मेकर’ में गंवा दिए। हालांकि पुलिस अब इस दावे की वित्तीय जांच कर रही है और रकम के वास्तविक इस्तेमाल की पड़ताल कर रही है।
मामला सिर्फ बैंक से पैसे निकालने तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसियां यह भी जानने की कोशिश कर रही हैं कि ग्राहकों के खातों से निकाली गई रकम आखिर किन-किन माध्यमों में खर्च हुई और क्या इस पूरे मामले में अन्य लोगों की भी भूमिका थी।
गेमिंग की लत ने बढ़ाई मुश्किल
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आरोपी किसी ऑनलाइन लिंक के जरिए ‘स्टार मेकर’ प्लेटफॉर्म से जुड़ी थी। पूछताछ में उसने दावा किया कि लगातार गेम खेलने के दौरान बड़ी रकम हार गई। यदि जांच में यह बात सही साबित होती है तो यह मामला ऑनलाइन गेमिंग की लत और वित्तीय अपराध के खतरनाक मेल का उदाहरण बन सकता है।
बैंक की रकम से परिवार की यात्राएं
जांच में यह भी सामने आया है कि गबन की गई राशि का एक हिस्सा निजी खर्चों पर लगाया गया। पुलिस के अनुसार ऋतु ने अपने पति, बच्चों और सास-ससुर को हवाई यात्रा कराई। परिवार को मुंबई, दिल्ली और इंदौर जैसे शहरों की सैर भी कराई गई। इससे यह संकेत मिलता है कि रकम का उपयोग केवल गेमिंग तक सीमित नहीं था।
फरारी के दौरान बदली रणनीति
बैंक से रकम लेकर निकलने के बाद आरोपी मुंबई स्थित अपने ससुराल पहुंच गई थी। वहां उसने परिवार को बताया कि वह छुट्टी पर आई है। जांच में यह भी सामने आया कि संपर्क से बचने के लिए परिवार के मोबाइल नंबर बंद करा दिए गए थे। इससे पुलिस की तलाश और चुनौतीपूर्ण हो गई।
दिल्ली से इंदौर तक चला तलाश अभियान
आरोपी की खोज में पुलिस टीम मुंबई और दिल्ली तक पहुंची। दिल्ली के रोहिणी क्षेत्र में पुलिस ने कई दिनों तक गुप्त रूप से जानकारी जुटाई। स्थानीय लोगों के बीच रहकर उसकी गतिविधियों पर नजर रखी गई। हालांकि गिरफ्तारी से पहले आरोपी परिवार के साथ इंदौर होते हुए वापस खरगोन पहुंच गई, जहां पुलिस ने उसे दबोच लिया।
दो और आरोपियों की तलाश जारी
मामले की जांच अभी पूरी नहीं हुई है। पुलिस के मुताबिक शाखा के सहायक कैशियर त्रयंबक वाणी और शाखा प्रबंधक राजेश राठौड़ अभी भी फरार हैं। दोनों की तलाश में लगातार दबिश दी जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि गबन की पूरी रकम कहां-कहां खर्च हुई और क्या बैंक की आंतरिक प्रणाली में किसी स्तर पर मिलीभगत हुई थी।
पांच दिन की जांच के बाद दर्ज हुआ केस
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार 25 और 26 मई के दौरान बैंक से रकम गायब होने की जानकारी सामने आई थी। बैंक की आंतरिक जांच समिति ने कई दिनों तक दस्तावेजों की पड़ताल की। इसके बाद 29 मई को शाखा प्रबंधन की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया। अब गिरफ्तारी के बाद जांच का फोकस रकम की रिकवरी और पूरे नेटवर्क की पहचान पर है।