अमेठी के शिवम शुक्ला, जिन्हें कभी अखिलेश यादव ने स

अखिलेश यादव की साइकिल से सम्मानित शिवम बने समीक्षा अधिकारी, अमेठी में जश्न

अमेठी। उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले के रहने वाले शिवम शुक्ल ने संघर्ष और मेहनत के दम पर बड़ी सफलता हासिल की है। इंटरमीडिएट में टॉप करने पर तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से साइकिल से सम्मानित हुए शिवम अब समीक्षा अधिकारी बन गए हैं। उनकी इस उपलब्धि से पूरे परिवार और क्षेत्र में खुशी का माहौल है।

छोटे व्यापारी के बेटे ने हासिल की बड़ी सफलता

शिवम शुक्ल एक साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता विनोद कुमार शुक्ल अमेठी के राजा-रानी मार्केट में छोटी सी कपड़े की दुकान चलाकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद शिवम ने पढ़ाई में लगातार उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। शिवम के चयन की खबर मिलते ही परिवार में जश्न शुरू हो गया। रिश्तेदारों और परिचितों का घर पर बधाई देने के लिए तांता लग गया। पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय सिंह और पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. अमिता सिंह भी उनके घर पहुंचकर शुभकामनाएं दीं।

पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ अमिता सिंह के साथ शिवम

शिवम की माता बृजलेश शुक्ल ने कहा कि बेटे की मेहनत रंग लाई है, लेकिन उनका लक्ष्य अभी पूरा नहीं हुआ है। वहीं उनके चाचा मनोज शुक्ल और प्रमोद शुक्ल ने बताया कि परिवार में पहली बार किसी ने सरकारी नौकरी हासिल की है, जिससे सभी को गर्व है।

शुरुआत से ही रहे मेधावी छात्र

शिवम शुक्ल शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल रहे हैं। हाईस्कूल में उन्होंने 91 प्रतिशत और इंटरमीडिएट में 96 प्रतिशत अंक हासिल किए। इंटर में जिला टॉप करने के साथ ही वे प्रदेश में सातवें स्थान पर रहे थे। इसी उपलब्धि पर उन्हें तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा साइकिल और लैपटॉप देकर सम्मानित किया गया था। शिवम ने प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू संस्थान से सिविल इंजीनियरिंग में बी-टेक किया। इसके बाद उनका चयन एक निजी कंपनी में हुआ, जहां उन्होंने दो साल नौकरी की। हालांकि, प्रशासनिक सेवा में जाने के अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने नौकरी छोड़ दी और दिल्ली जाकर तैयारी शुरू की।

आईएएस बनने का है लक्ष्य

27 वर्षीय शिवम शुक्ल का कहना है कि समीक्षा अधिकारी बनना उनकी पहली सफलता है। उनका अंतिम लक्ष्य आईएएस अधिकारी बनना है और इसके लिए वे लगातार प्रयास कर रहे हैं। उनकी यह सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं और उन्हें पूरा करने के लिए संघर्ष करते हैं।