ईरान युद्ध के बीच अमेरिका ने ‘डूम्सडे मिसाइल’ का परीक्षण किया, मिनुटमैन-III दुनिया में कहीं भी कर सकती है हमला
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच United States ने अपनी इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल LGM-30G Minuteman III का परीक्षण किया है। यह परीक्षण 3 मार्च को Vandenberg Space Force Base से किया गया। मिसाइल बिना हथियार के लॉन्च की गई थी और इसमें दो टेस्ट री-एंट्री व्हीकल लगाए गए थे। अमेरिकी वायुसेना के Air Force Global Strike Command ने कहा कि यह परीक्षण पहले से तय कार्यक्रम का हिस्सा था और इसका मौजूदा युद्ध की स्थिति से सीधा संबंध नहीं है।
हजारों किलोमीटर दूर लक्ष्य पर किया वार
परीक्षण के दौरान मिसाइल ने हजारों किलोमीटर की दूरी तय की और अंत में Kwajalein Atoll के पास निर्धारित लक्ष्य क्षेत्र में पहुंची। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार इस तरह की लंबी दूरी की उड़ान से इंजीनियर और हथियार विशेषज्ञ मिसाइल की सटीकता, गति और विश्वसनीयता से जुड़ा अहम डेटा इकट्ठा करते हैं। यह डेटा भविष्य में हथियार प्रणाली को और बेहतर बनाने में काम आता है।
क्यों कहा जाता है ‘डूम्सडे मिसाइल’
Minuteman-III को अक्सर “डूम्सडे मिसाइल” कहा जाता है। इसकी वजह इसकी परमाणु क्षमता और लंबी मारक दूरी है। इसकी प्रमुख खासियतें
- करीब 13,000 किलोमीटर तक मार करने की क्षमता
- परमाणु वारहेड ले जाने में सक्षम
- अमेरिका की साइलो-बेस्ड, लैंड-बेस्ड ICBM प्रणाली का मुख्य हिस्सा
- पहले इसमें तीन अलग-अलग वारहेड ले जाने की क्षमता थी
हालांकि अमेरिका और Russia के बीच परमाणु हथियारों को कम करने की संधि के बाद वर्तमान में हर मिसाइल में केवल एक वारहेड रखा जाता है।

ईरान युद्ध के बीच बढ़ी चिंता
यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब Iran, Israel और अमेरिका के बीच संघर्ष तेज हो चुका है। मध्य-पूर्व में हालिया घटनाओं के बाद दोनों पक्षों के बीच मिसाइल हमले और सैन्य कार्रवाई बढ़ गई है। इसी वजह से अमेरिका के इस परीक्षण ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही यह परीक्षण पहले से तय था, लेकिन मौजूदा युद्ध के माहौल में इसका प्रतीकात्मक महत्व काफी बड़ा माना जा रहा है।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे परीक्षण
अमेरिका समय-समय पर Minuteman-III का परीक्षण करता रहता है। इससे पहले भी नवंबर 2025 में इस मिसाइल का टेस्ट किया गया था। अमेरिकी सेना के मुताबिक पिछले कई दशकों में इस मिसाइल सिस्टम की विश्वसनीयता जांचने के लिए 300 से ज्यादा परीक्षण किए जा चुके हैं।