अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बाद ईरान ने छह देशों में अम

ईरान के पलटवार से मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव, क्या होर्मुज विवाद जंग को और फैलाएगा?

Middle East Tension News

अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव अब खाड़ी क्षेत्र के कई देशों तक फैलता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी एयरस्ट्राइक के बाद ईरान ने जॉर्डन, कुवैत, बहरीन, कतर, UAE और ओमान में अमेरिकी सैन्य ठिकानों व रणनीतिक परिसंपत्तियों को मिसाइल और ड्रोन से निशाना बनाने का दावा किया है। इस घटनाक्रम ने मिडिल ईस्ट की सुरक्षा स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

तनाव की शुरुआत होर्मुज स्ट्रेट में एक कंटेनर जहाज पर हुए हमले के बाद हुई। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इसी घटना के जवाब में अमेरिका ने ईरान के करीब 140 सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। इसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई तेज करते हुए होर्मुज स्ट्रेट को अगले आदेश तक बंद करने की घोषणा भी कर दी।

अमेरिकी हमलों के बाद ईरान का जवाब

ईरान ने दावा किया कि उसकी जवाबी कार्रवाई में जॉर्डन के प्रिंस हसन एयरबेस, कुवैत में अमेरिकी पैट्रियट एयर डिफेंस सिस्टम और रडार साइट, बहरीन के सैन्य संचार केंद्र तथा कतर, UAE और ओमान की दिशा में मिसाइल और ड्रोन दागे गए। जॉर्डन ने तीन बैलिस्टिक मिसाइल गिरने की पुष्टि की है, हालांकि किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। बहरीन और कतर में मिसाइल अलर्ट जारी किया गया, जबकि ओमान ने भी अपने मुसंदम गवर्नरेट में ड्रोन हमलों की पुष्टि की है।

होर्मुज स्ट्रेट बना टकराव की सबसे बड़ी वजह

दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते होती है। ईरान चाहता है कि इस समुद्री मार्ग पर उसकी भूमिका और नियंत्रण बना रहे, जबकि अमेरिका निर्बाध अंतरराष्ट्रीय आवाजाही की वकालत कर रहा है। इसी रणनीतिक महत्व ने मौजूदा विवाद को केवल सैन्य नहीं बल्कि वैश्विक आर्थिक चिंता का विषय भी बना दिया है।

भारत की चिंता बढ़ी

ओमान तट के पास व्यापारी जहाज 'GFS Galaxy' पर हुए हमले के बाद भारत ने नागरिक जहाजों पर हमलों की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय के अनुसार जहाज पर मौजूद 11 भारतीयों में से 10 सुरक्षित हैं, जबकि एक व्यक्ति अब भी लापता है। भारतीय दूतावास स्थानीय प्रशासन के साथ राहत और खोज अभियान पर नजर बनाए हुए है। भारत ने क्षेत्र में तनाव कम करने और अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों को सुरक्षित रखने की अपील भी की है।

बयानों से और तेज हुआ टकराव

ईरान के नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने अपने पिता अली खामेनेई और युद्ध में मारे गए लोगों की मौत का बदला लेने की बात कही है। दूसरी ओर विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया। इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी कि यदि उनके खिलाफ किसी हमले की कोशिश हुई तो अमेरिका हजारों मिसाइलों से जवाब देगा। दोनों देशों के सख्त रुख ने कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं को और मुश्किल बना दिया है।

क्षेत्रीय संकट का असर दुनिया पर भी पड़ सकता है

होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव का असर केवल खाड़ी देशों तक सीमित नहीं है। वैश्विक तेल आपूर्ति, समुद्री व्यापार और ऊर्जा बाजार पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में मिडिल ईस्ट का यह टकराव अब केवल अमेरिका और ईरान के बीच की लड़ाई नहीं रह गया, बल्कि कई देशों की सुरक्षा और विश्व अर्थव्यवस्था से जुड़ा बड़ा भू-राजनीतिक संकट बनता जा रहा है।