ईरान ने साफ किया कि वह अपने न्यूक्लियर प्रोग्राम स

ईरान का सख्त संदेश: न्यूक्लियर ताकत पर नहीं होगा समझौता, अमेरिका को दी खुली चेतावनी

Middle East war New Tension

ईरान ने एक बार फिर अपने रुख को साफ करते हुए कहा है कि वह किसी भी कीमत पर अपने न्यूक्लियर और मिसाइल प्रोग्राम को नहीं छोड़ेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में तनाव बढ़ा हुआ है। मुजतबा खामेनेई ने सरकारी टीवी पर जारी संदेश में कहा कि यह ताकत देश की संपत्ति है और इसकी हर हाल में रक्षा की जाएगी। 

इस बयान के साथ ही अमेरिका को लेकर भी कड़ा संदेश दिया गया। जिससे मध्य पूर्व की स्थिति और संवेदनशील हो गई है।

अमेरिका पर सीधा हमला

खामेनेई ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को लेकर तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जो बेस खुद सुरक्षित नहीं हैं, वे दूसरे देशों को सुरक्षा देने का दावा कैसे कर सकते हैं। यह बयान सीधे तौर पर अमेरिका की क्षेत्रीय भूमिका को चुनौती देता है। इससे दोनों देशों के बीच पहले से चल रहा तनाव और गहरा हो सकता है।

होर्मुज स्ट्रेट बना वैश्विक चिंता

हॉर्मुज स्ट्रेट को लेकर भी ईरान ने बड़ा बयान दिया है। खामेनेई ने कहा कि यहां एक नया दौर शुरू हो चुका है, जो आगे चलकर क्षेत्र में बदलाव लाएगा। दूसरी ओर संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस ने चेतावनी दी है कि यहां की स्थिति का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।

भारत को भरोसा देने की कोशिश

भारत में ईरान के राजदूत डॉ. मोहम्मद फतहाली ने कहा कि ईरान में रह रहे भारतीय पूरी तरह सुरक्षित हैं। सरकार सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार करती है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय जहाजों को हॉर्मुज स्ट्रेट से गुजरने में कोई रोक नहीं है, बशर्ते वे अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करें।

चाबहार प्रोजेक्ट पर फोकस

चाबहार पोर्ट को लेकर भी ईरान ने सकारात्मक संकेत दिए हैं। राजदूत के मुताबिक यह प्रोजेक्ट लगातार आगे बढ़ रहा है और कभी रुका नहीं। चाबहार-ज़ाहेदान रेल लाइन का 90% काम पूरा हो चुका है। इसके पूरा होने के बाद यह पोर्ट सीधे राष्ट्रीय रेल नेटवर्क से जुड़ जाएगा, जिससे क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को बड़ा फायदा होगा।

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

यूएन प्रमुख ने साफ कहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में रुकावटें वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर रही हैं। उनके मुताबिक हालात सामान्य होने के बाद भी अर्थव्यवस्था को पटरी पर लौटने में महीनों लग सकते हैं। इस दौरान महंगाई और धीमी ग्रोथ का दबाव बना रह सकता है।