अब्राहम लिंकन पर मिसाइलें!, मिडिल ईस्ट तनाव पर ईरान का बड़ा दावा, हमले के संकेत से बढ़ा तनाव
मिडिल ईस्ट में चल रही जंग को धीरे-धीरे करके अब एक महीना पूरा होते जा रहा है। जंग एक ऐसे मोड़ पर पहुंचती दिख रही है, जहां हर दिन नया दावा, नई चेतावनी दी जा रही है। साथ ही नया तनाव सामने आ रहा है। ताजा मामला ईरान के उस दावे से जुड़ा है, जिसमें उसने अमेरिका के ताकतवर एयरक्राफ्ट कैरियर यूएसएस अब्राहम लिंकन को निशाना बनाने की बात कही है।
मिसाइल दागने का दावा, लेकिन पुष्टि नहीं
ईरानी सरकारी टीवी के मुताबिक, क्रूज मिसाइलें अमेरिकी युद्धपोत की दिशा में दागी गईं। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। वहीं, अमेरिका की ओर से भी अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यही वजह है कि मामला अभी दावे और सच्चाई के बीच अटका हुआ है।
पहले चेतावनी, अब कार्रवाई का दावा
इससे पहले ईरान की नौसेना ने साफ चेतावनी दी थी कि अगर यूएसएस अब्राहम लिंकन उसकी मिसाइल रेंज में आता है, तो उसे निशाना बनाया जाएगा। ईरानी नौसेना के कमांडर शहराम ईरानी ने कहा था कि इस अमेरिकी पोत पर लगातार नजर रखी जा रही है। साथ ही जरूरत पड़ी तो कार्रवाई होगी। अब उसी चेतावनी के बाद यह दावा सामने आया है। इससे तनाव और बढ़ गया है।
अमेरिका की ताकत अब नाकामी में बदल गई
ईरान के सैन्य नेतृत्व ने सिर्फ सैन्य कार्रवाई ही नहीं, बल्कि अमेरिका की रणनीतिक ताकत पर भी सवाल उठाए हैं। खातम अल-अनबिया मुख्यालय के प्रवक्ता इब्राहिम जोलफघारी ने कहा कि अमेरिका की 'तथाकथित ताकत' अब रणनीतिक हार में बदल चुकी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अगर अमेरिका इस हालात से निकल सकता, तो अब तक निकल चुका होता। उन्होंने कहा कि अपनी हार को समझौता मत कहिए।
ट्रम्प के दावों पर भी सवाल
डोनाल्ड ट्रम्प ने हाल ही में दावा किया था कि ईरान के साथ 'अच्छी और रचनात्मक बातचीत' हो रही है। लेकिन ईरान ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया। तेहरान के सूत्रों और अधिकारियों का कहना है कि दोनों देशों के बीच न कोई सीधी, न ही परोक्ष बातचीत हुई है। यहां तक कि ईरानी पक्ष ने यह भी कहा कि अब वॉशिंगटन के आश्वासनों पर भरोसा करने का दौर खत्म हो चुका है।
टकराव के बीच बढ़ती दूरी
ईरान की ओर से बयानबाजी लगातार सख्त होती जा रही है। जोलफघारी ने साफ कहा कि अब हालात पहले जैसे नहीं रहेंगे, और जब तक ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का खतरा पूरी तरह खत्म नहीं होता, तब तक किसी सामान्य स्थिति की उम्मीद भी नहीं की जानी चाहिए। उनके बयान से यह भी साफ है कि फिलहाल बातचीत के दरवाजे लगभग बंद हैं। साथ ही दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर अड़े हुए हैं।