केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार योजना ‘VB-G RAM G’

VB-G RAM G: ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की नई गारंटी, केंद्र ने वीबी-जी राम जी अधिनियम के ड्राफ्ट नियम जारी किए

केंद्र सरकार ने ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़े बदलाव की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। ‘विकसित भारत – रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)’ यानी VB-G RAM G के ड्राफ्ट नियम जारी कर दिए गए हैं। यह नई योजना 1 जुलाई 2026 से लागू हो सकती है और इसे मौजूदा ग्रामीण रोजगार गारंटी ढांचे के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है।  सरकार ने इन नियमों को सार्वजनिक परामर्श के लिए जारी किया है, ताकि राज्यों, विशेषज्ञों और आम लोगों से सुझाव लेकर इसे अंतिम रूप दिया जा सके। फिलहाल यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह योजना पूरी तरह से पुराने ढांचे को बदल देगी या उसे नया रूप देगी।

मनरेगा की जगह नया ढांचा?

नई योजना को लेकर सबसे बड़ी चर्चा इसी बात पर है कि क्या यह मौजूदा MGNREGA को पूरी तरह रिप्लेस करेगी ड्राफ्ट नियमों के मुताबिक, इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में 125 दिनों तक रोजगार की गारंटी देने की बात कही गई है। इसके साथ ही प्रशासनिक ढांचे, मजदूरी भुगतान और शिकायत निवारण प्रणाली को भी नए सिरे से तैयार किया गया है, हालांकि, सरकार का कहना है कि संक्रमण काल में किसी भी श्रमिक का अधिकार प्रभावित नहीं होगा और चल रहे कार्य जारी रहेंगे।

क्यों लाया जा रहा है नया कानून?

दरअसल, सरकार का फोकस ग्रामीण रोजगार प्रणाली को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाना है। नए मसौदे में ई-केवाईसी आधारित जॉब कार्ड, केंद्रीय स्तर की निगरानी समिति और वित्तीय प्रबंधन प्रणाली को शामिल किया गया है. इसी के साथ बेरोजगारी भत्ते और मजदूरी भुगतान को भी अधिक व्यवस्थित बनाने की कोशिश की गई है, ताकि देरी और गड़बड़ी की शिकायतें कम हों।

राज्यों और जनता की राय अहम

सरकार ने साफ किया है कि यह ड्राफ्ट अंतिम नहीं है। राज्यों, विशेषज्ञों, नागरिक संगठनों और आम लोगों से सुझाव मांगे गए हैं। इसके बाद ही नियमों को अंतिम रूप दिया जाएगा ऐसे में ग्रामीण विकास से जुड़े कई जानकार मानते हैं कि यह कदम भारत के रोजगार मॉडल में बड़ा बदलाव ला सकता है, लेकिन इसके असर को जमीन पर लागू होने के बाद ही पूरी तरह समझा जा सकेगा।

ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर क्या होगा?

अगर यह योजना लागू होती है, तो इसका सीधा असर ग्रामीण मजदूरी, स्थानीय रोजगार और पंचायत स्तर की परियोजनाओं पर पड़ेगा। सरकार का दावा है कि इससे काम की गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ेगी।

हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन सबसे बड़ी चुनौती होगी, क्योंकि ग्रामीण रोजगार योजनाएं राज्यों पर काफी हद तक निर्भर करती हैं फिलहाल, सभी की नजर 1 जुलाई 2026 की संभावित शुरुआत पर टिकी हुई है, जब यह नई व्यवस्था लागू होने की उम्मीद है।