उपराष्ट्रपति ने 'आरएसएस @100: एक सदी संकल्प की' पुस्तक का विमोचन किया
संघ ने सेवा, एकता और राष्ट्रीय चेतना के आदर्शों को सुदृढ़ किया : राधाकृष्णन
'आरएसएस @100: एक सदी संकल्प की' पुस्तक के विमोचन अवसर पर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में प्रकाशित इस पुस्तक के विमोचन में सहभागी होना उनके लिए व्यक्तिगत गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि उनका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ दीर्घकालिक जुड़ाव रहा है।संघ पर आधारित एक तमिल कविता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना पवित्र गंगा से की गई है, जो निःस्वार्थ भाव से दूसरों के कल्याण के लिए निरंतर प्रवाहित होती है।
उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा चरित्र-निर्माण और नेतृत्व विकास पर दिए जाने वाले जोर का भी उल्लेख किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये मूल्य रोजाना लगने वाली शाखाओं के माध्यम से विकसित किए जाते हैं। ये शाखाएं अनुशासन, समय की पाबंदी, शारीरिक दक्षता, टीम वर्क तथा समाज और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य की भावना विकसित करती हैं।
संघ की यात्रा सांस्कृतिक जड़ों की यात्रा
पुस्तक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मूल दर्शन और कार्य-परंपरा का प्रभावी चित्रण करने के लिए लेखकों की सराहना करते हुए श्री राधाकृष्णन ने कहा कि संघ की यात्रा भारत की सांस्कृतिक जड़ों, विरासत और परंपराओं के पुनर्जागरण, सुदृढ़ीकरण और पुनर्स्थापन की यात्रा रही है।पुस्तक के शीर्षक में उल्लिखित 'सेवा, एकता और त्याग' का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि इन मूल आदर्शों ने स्वयंसेवकों की पीढ़ियों को प्रेरित किया है।
इस अवसर पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के क्षेत्र संघचालक पवन जिंदल, पुस्तक के सह-लेखक श्याम जाजू एवं अनुपम त्रिवेदी, प्रभात प्रकाशन के प्रबंध निदेशक प्रभात कुमार सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।