कोलकाता में TMC मुख्यालय पर बागी गुट ने कब्जा कर ल

TMC मुख्यालय पर बागी गुट का कब्जा, चुनाव आयोग में दावे के बाद बढ़ा सियासी संघर्ष

Rebel Leader take TMC Office

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी सियासी संघर्ष शुक्रवार को नए मोड़ पर पहुंच गया। चुनाव आयोग में पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा पेश करने के एक दिन बाद बागी गुट ने पार्टी मुख्यालय पर कब्जा कर लिया। मुख्यालय के ताले बदल दिए गए और बाहर नए पोस्टर लगाए गए, जिनमें ममता बनर्जी की तस्वीर नहीं दिखाई दी।

हालांकि भवन के अंदर लगी ममता बनर्जी की तस्वीरों और कटआउट को नहीं हटाया गया। बागी गुट के नेता ऋतब्रत बनर्जी ने समर्थकों के साथ मुख्यालय में बैठक कर खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बताते हुए घोषणा की कि अब पार्टी की गतिविधियां यहीं से संचालित होंगी।

चुनाव आयोग में दावे के बाद तेज हुई सियासी लड़ाई

गुरुवार को बागी गुट ने चुनाव आयोग में तृणमूल कांग्रेस के नाम, चुनाव चिह्न और संगठन पर अपना दावा पेश किया था। इसके अगले ही दिन मुख्यालय पर कब्जे की कार्रवाई ने साफ संकेत दिया कि अब विवाद केवल नेतृत्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि संगठन और राजनीतिक पहचान की लड़ाई में बदल चुका है। वहीं, टीएमसी के दो गुटों के बीच मेट्रोपॉलिटन में पार्टी मुख्यालय (ट्रिनमूल भवन) पर नियंत्रण को लेकर हुए विवाद के बाद, पार्टी कार्यालय के सामने CRPF तैनात कर दी गई है।

Following the tussle of two faction of tmc over the control of TMC headquarter in Metropolitan, CRPF has been deployed in front of Party office. https://t.co/kGmoenwoTD pic.twitter.com/ZiTLsYf8ga

— Piyali Mitra (@Plchakraborty) July 3, 2026

विधानसभा चुनाव के बाद बढ़ा असंतोष

विधानसभा चुनाव में हार के बाद पार्टी के भीतर असंतोष खुलकर सामने आया। 3 जून को 80 में से 58 विधायक ममता बनर्जी के नेतृत्व से अलग हो गए। इसके बाद 22 जून को हुई प्रतिनिधि बैठक में नए अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और 30 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन किया गया। बागी विधायक पहले ही विधानसभा अध्यक्ष को ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष बनाने के समर्थन पत्र सौंप चुके हैं।

कुनाल घोष को नहीं मिली मुख्यालय में एंट्री

ममता बनर्जी समर्थक गुट के वरिष्ठ नेता कुनाल घोष पार्टी कार्यालय पहुंचे, लेकिन मुख्य गेट पर ताला बदला होने के कारण अंदर नहीं जा सके। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यालय पर कब्जा प्रशासन और पुलिस की सहमति से कराया गया है। साथ ही उन्होंने कहा कि बागी नेता निर्दलीय चुनाव जीतकर नहीं आए थे, इसलिए उनके दावे को वैध नहीं माना जा सकता।

ममता गुट की राजनीतिक ताकत हुई कमजोर

बागी गुट के अलग होने के बाद ममता बनर्जी के पास विधानसभा में केवल 22 विधायक बचे हैं। लोकसभा में TMC के 28 सांसदों में से 20 अलग हो चुके हैं और अब उनके साथ सिर्फ 8 सांसद हैं। राज्यसभा में भी 13 में से 4 सांसद इस्तीफा दे चुके हैं, जिससे पार्टी की संख्या घटकर 9 रह गई है। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा शक्ति संतुलन बदलने वाला माना जा रहा है।

महाराष्ट्र की शिवसेना बगावत से हो रही तुलना

राजनीतिक विश्लेषक इस घटनाक्रम की तुलना महाराष्ट्र में शिवसेना के विभाजन से कर रहे हैं। वहां भी दो-तिहाई विधायकों के समर्थन के आधार पर अलग गुट ने संगठन और चुनाव चिह्न पर दावा किया था। अब पश्चिम बंगाल में भी नजरें चुनाव आयोग और संवैधानिक प्रक्रियाओं पर टिकी हैं, क्योंकि आगे का फैसला पार्टी की कानूनी और राजनीतिक स्थिति तय करेगा।