तमिलनाडु-बंगाल चुनाव: प्रचार का आखिरी दिन, नेताओं के तीखे बयान; 29 अप्रैल को अगला चरण
चेन्नई: तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां अपने चरम पर पहुंच गई हैं। आज शाम 5 बजे तमिलनाडु की सभी 234 सीटों और पश्चिम बंगाल के पहले चरण की सीटों के लिए चुनाव प्रचार थम जाएगा। चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार पश्चिम बंगाल में दूसरे चरण की वोटिंग 29 अप्रैल को होगी, जबकि मतगणना 4 मई को की जाएगी।
दार्जिलिंग में अमित शाह की रैली, गोरखा मुद्दा उठाया
केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah ने दार्जिलिंग में चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि कांग्रेस और टीएमसी ने गोरखा समुदाय के साथ अन्याय किया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि भाजपा की सरकार बनने पर गोरखा समाज की लंबित समस्याओं का समाधान छह महीने के भीतर किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने आदिवासी और पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अपेक्षाकृत कम बजट आवंटित किया, जबकि अन्य मदों में अधिक खर्च किया गया।
तमिलनाडु में बयानबाजी तेज
तमिलनाडु में भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा नेता K. Annamalai ने दावा किया कि राज्य में पार्टी जीत की ओर बढ़ रही है और जनता बदलाव चाहती है। वहीं, आम आदमी पार्टी के संयोजक Arvind Kejriwal ने चेन्नई में डीएमके के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए भाजपा की नीतियों की आलोचना की और कहा कि राज्य के लोग विभाजनकारी राजनीति को स्वीकार नहीं करेंगे। कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge ने भी केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि तमिलनाडु के विकास में बाधा डाली जा रही है और शिक्षा से जुड़े फंड रोके जा रहे हैं।
एनडीए की ओर से विकास का मुद्दा
आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री N. Chandrababu Naidu ने मतदाताओं से अपील की कि वे विकास और रोजगार के लिए एनडीए का समर्थन करें। उन्होंने कहा कि यह चुनाव राज्य के भविष्य के लिए अहम अवसर है।
बंगाल में निष्पक्ष चुनाव का भरोसा
मुख्य चुनाव आयुक्त Gyanesh Kumar ने पश्चिम बंगाल में निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव कराने का भरोसा दिलाया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग सभी जरूरी कदम उठा रहा है ताकि मतदाता बिना किसी दबाव के मतदान कर सकें।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
चुनाव प्रचार के आखिरी दिन सभी दलों ने पूरी ताकत झोंक दी है। रैलियां, रोड शो और जनसभाएं तेज हो गई हैं। प्रशासन ने भी सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं, ताकि मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी हो सके। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस बार तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल दोनों राज्यों में कड़ा मुकाबला देखने को मिल सकता है, जहां स्थानीय मुद्दों के साथ राष्ट्रीय राजनीति का असर भी साफ दिखाई दे रहा है।