महागठबंधन में सीएम चेहरे पर सस्पेंस बरकार, पशुपति पारस को पार्टी में मिली एंट्री
Bihar Election: बिहार में होने वाले अगले चुनाव को लेकर महागठबंधन की तैयारियां तेज हो गई हैं। पटना में महागठबंधन की एक बड़ी बैठक हुई, जो करीब ढाई घंटे तक चली। इस बैठक में तेजस्वी यादव, कांग्रेस के नेता, वामपंथी दलों के प्रतिनिधि और वीआईपी पार्टी के मुखिया मुकेश सहनी शामिल हुए। बैठक में कई अहम फैसले लिए गए, लेकिन मुख्यमंत्री पद का चेहरा कौन होगा—इस पर कोई सहमति नहीं बन पाई।
इस बैठक में यह तय हुआ कि पशुपति कुमार पारस अब महागठबंधन का हिस्सा होंगे। पहले वे एनडीए के साथ थे, लेकिन अब वे विपक्षी खेमे में आ गए हैं। यह फैसला महागठबंधन के लिए एक बड़ी बात मानी जा रही है। इसके अलावा, महागठबंधन ने एक 'को-ऑर्डिनेशन कमेटी' यानी समन्वय समिति बनाने का भी फैसला लिया है, जिसकी कमान तेजस्वी यादव को सौंपी गई है।
सीएम पद को लेकर अब भी सस्पेंस
महागठबंधन की इस बैठक से पहले उम्मीद की जा रही थी कि मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार का नाम तय हो जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हो सका। कांग्रेस के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरू ने कहा कि सभी दलों ने अपनी-अपनी बात रखी है और जल्द ही सभी मुद्दों पर एक राय बन जाएगी। उन्होंने कहा कि हमारी लड़ाई बीजेपी और एनडीए से है, न कि आपस में।
मुकेश सहनी ने भी कहा कि अब पुरानी बातों को दोहराने का समय नहीं है। अब जनता के मुद्दों पर बात करनी चाहिए। उन्होंने खुद को निषाद समाज की आवाज बताया और कहा कि वे पहले ऐसे नेता हैं जिन्होंने एनडीए सरकार में मंत्री रहते हुए भी मोदी और योगी के खिलाफ चुनाव लड़ा।
बीजेपी पर आरोप
वाम दलों ने बीजेपी पर जमकर निशाना साधा। सीपीआई नेता कुणाल ने कहा कि पिछले 20 सालों से बीजेपी पर्दे के पीछे से सरकार चला रही है। उन्होंने कहा कि पलायन, बेरोजगारी, शिक्षा की खराब स्थिति और महिलाओं की दिक्कतें सब इसी शासन की देन हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं कर्ज में डूबकर आत्महत्या कर रही हैं और मजदूरों को उनके हक का पैसा नहीं मिल रहा।
सीपीआई एमएल नेता राम नरेश पांडे ने कहा कि बिहार की हालत बहुत खराब है। बच्चियों के साथ अपराध हो रहे हैं, लेकिन पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही। उन्होंने नारा दिया—"बदलो सरकार, बचाओ बिहार"। उन्होंने कहा कि जब बिहार बदलाव करता है, तो पूरे देश की तस्वीर बदल जाती है।