सुप्रीम कोर्ट की सख्ती: नेताजी को ‘राष्ट्रपुत्र’ घोषित करने की मांग खारिज, याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को ‘राष्ट्रपुत्र’ घोषित करने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया है। अदालत ने याचिकाकर्ता के रवैये पर नाराजगी जताते हुए सख्त टिप्पणी की और इसे समय की बर्बादी बताया।
कोर्ट ने क्यों लगाई फटकार?
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता बार-बार इसी तरह की याचिकाएं दाखिल कर रहे हैं। कोर्ट ने टिप्पणी की कि “पब्लिसिटी के लिए इस तरह की याचिकाएं दायर की जा रही हैं।” अदालत ने यह भी चेतावनी दी कि यदि यही रवैया जारी रहा तो याचिकाकर्ता के सुप्रीम कोर्ट में प्रवेश पर रोक तक लगाई जा सकती है।
रजिस्ट्री को सख्त निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने रजिस्ट्री को निर्देश दिया है कि भविष्य में याचिकाकर्ता द्वारा दायर की जाने वाली किसी भी PIL को स्वीकार न किया जाए। इससे साफ संकेत मिलता है कि अदालत अब ऐसे मामलों पर सख्ती से निपटने के मूड में है। याचिका में क्या थीं मांगें याचिकाकर्ता ने कई मांगें रखी थीं, जिनमें प्रमुख हैं
- नेताजी सुभाष चंद्र बोस को ‘राष्ट्रपुत्र’ घोषित किया जाए
- आजाद हिंद फौज (INA) के स्थापना दिवस को राष्ट्रीय दिवस घोषित किया जाए
- नेताजी की जयंती को राष्ट्रीय दिवस का दर्जा मिले
- कटक स्थित जन्मस्थान को राष्ट्रीय संग्रहालय बनाया जाए
- स्वतंत्रता संग्राम में क्रांतिकारियों और INA को आधिकारिक श्रेय दिया जाए
पहले भी खारिज हो चुकी है याचिका
यह पहला मौका नहीं है जब इस तरह की याचिका खारिज हुई है। इससे पहले भी याचिकाकर्ता 2024 में नेताजी की मौत की जांच की मांग लेकर अदालत पहुंचे थे, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। इस फैसले से यह स्पष्ट हो गया है कि सुप्रीम कोर्ट केवल गंभीर और जनहित से जुड़े मामलों पर ही सुनवाई करना चाहता है। बार-बार समान मुद्दों पर याचिकाएं दाखिल करने पर अदालत अब सख्त कार्रवाई के संकेत दे रही है।