Foreign Divorce पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: भारतीय कानून के बिना विदेशी तलाक मान्य नहीं
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने विदेशी तलाक के मामलों को लेकर एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि किसी विदेशी कोर्ट द्वारा दिया गया तलाक भारतीय कानून, विशेषकर हिंदू विवाह अधिनियम के अनुरूप नहीं है, तो उसे भारत में वैध नहीं माना जाएगा।सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया और संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए संबंधित दंपति को अंतिम तलाक प्रदान किया।
18 साल से अलग रह रहे थे दोनों पक्ष
यह मामला एक ऐसे दंपति से जुड़ा था, जिनकी शादी 25 दिसंबर 2005 को मुंबई में हिंदू रीति-रिवाजों से हुई थी। शादी के बाद दोनों अमेरिका चले गए, लेकिन कुछ समय बाद रिश्तों में खटास आ गई और सितंबर 2008 तक दोनों अलग हो गए। पत्नी ने अमेरिका के मिशिगन की अदालत में तलाक की अर्जी दी, जबकि पति ने भारतीय कानून के तहत इस पर आपत्ति जताई। इसके बावजूद अमेरिकी अदालत ने 13 फरवरी 2009 को “irretrievable breakdown of marriage” के आधार पर तलाक दे दिया।
भारतीय कानून में यह आधार मान्य नहीं
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि “irretrievable breakdown” यानी विवाह का अपूरणीय रूप से टूटना, हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक का मान्य आधार नहीं है। इसलिए विदेशी अदालत का फैसला भारत में लागू नहीं हो सकता। अदालत ने अपने ऐतिहासिक फैसले Y. Narasimha Rao vs Y. Venkata Lakshmi (1991) का हवाला देते हुए कहा कि विदेशी तलाक तभी मान्य होगा, जब वह भारतीय कानून और प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप हो।
सुप्रीम कोर्ट ने दो प्रमुख मुद्दों पर किया विचार
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दो मुख्य सवालों पर विचार किया
- क्या विदेशी तलाक का आदेश भारत में वैध है?
- क्या इस मामले में अनुच्छेद 142 के तहत अंतिम समाधान दिया जा सकता है?
इन दोनों बिंदुओं पर विचार करने के बाद कोर्ट ने विदेशी आदेश को अमान्य ठहराया।
अनुच्छेद 142 के तहत दिया अंतिम तलाक
हालांकि, लंबी कानूनी प्रक्रिया से बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 142 का उपयोग करते हुए दोनों पक्षों को अंतिम तलाक दे दिया। अदालत ने माना कि दोनों 18 वर्षों से अलग रह रहे हैं और अब सुलह की कोई संभावना नहीं है। यह फैसला उन सभी मामलों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां भारतीय नागरिक विदेश में तलाक लेते हैं। कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत में तलाक की वैधता के लिए भारतीय वैवाहिक कानूनों का पालन आवश्यक है। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह निर्णय भविष्य में ऐसे मामलों में स्पष्ट मार्गदर्शन देगा और विदेशी अदालतों के आदेशों की वैधता को लेकर उत्पन्न भ्रम को दूर करेगा।