सुप्रीम कोर्ट ने बंगाल चुनाव से पहले वोटर लिस्ट अप

बंगाल चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश, सप्लीमेंट्री लिस्ट में नाम जुड़ने पर वोटिंग की अनुमति

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में आगामी चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चुनाव से दो दिन पहले तक जिन मतदाताओं के नाम सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट में जुड़ेंगे, उन्हें मतदान करने की अनुमति दी जाएगी। यह आदेश मतदाता अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में मतदान

राज्य में दो चरणों में मतदान होना है। पहला चरण 23 अप्रैल और दूसरा चरण 29 अप्रैल को आयोजित होगा। सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया है कि पहले चरण से जुड़ी आपत्तियों का निपटारा 21 अप्रैल तक और दूसरे चरण की आपत्तियों का निपटारा 27 अप्रैल तक किया जाए।

ट्रिब्यूनल को समयसीमा में काम पूरा करने के निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि जैसे ही ट्रिब्यूनल किसी मतदाता का नाम जोड़ने का आदेश देगा, संबंधित इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर तुरंत सूची में संशोधन करें और अपडेटेड लिस्ट जारी करें। हालांकि, जिन मतदाताओं की आपत्तियां अभी भी ट्रिब्यूनल में लंबित हैं, उन्हें मतदान की अनुमति नहीं दी जाएगी।

SIR प्रक्रिया पर विवाद, लाखों नाम हटे

पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत बड़े पैमाने पर मतदाता सूची में संशोधन किया गया है। अब तक 90.83 लाख मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का करीब 11.85% है। इस मुद्दे पर राजनीतिक विवाद भी तेज हो गया है।सुनवाई के दौरान बताया गया कि 19 ट्रिब्यूनल के सामने 34 लाख से अधिक अपीलें लंबित हैं। ये ट्रिब्यूनल रिटायर्ड हाईकोर्ट जजों की अगुवाई में बनाए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रिब्यूनल पर अत्यधिक दबाव नहीं डाला जाना चाहिए, लेकिन एक मजबूत अपील व्यवस्था जरूरी है।

सीमा क्षेत्रों में ज्यादा असर

जानकारी के मुताबिक, बांग्लादेश सीमा से लगे जिलों में मतदाता सूची से नाम हटाने की संख्या ज्यादा रही है। नॉर्थ 24 परगना जैसे जिलों में लाखों नाम हटाए गए हैं, जिससे यह मुद्दा और संवेदनशील हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग और राज्य सरकार को ट्रिब्यूनल के काम में पूरा सहयोग देने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि यदि बड़ी संख्या में वास्तविक मतदाता वोटिंग से वंचित रह जाते हैं, तो चुनाव परिणामों की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं।