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आज है साल का पहला मंगला गौरी व्रत, जानिए इसका शुभ मुहूर्त और योग, पूजन विधि, महत्व

Sawan Mangala Gauri Vrat 2025: आज यानी 15 जुलाई को साल का पहला मंगला गौरी व्रत रखा जा रहा है। सनातन धर्म में सावन माह का विशेष महत्व बताया गया है। इस माह में जहां सोमवार को भगवान शिव की पूजा होती है, तो मंगलवार को भी महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए भगवान शिव और पार्वती की उपासना करती हैं। वही कुंवारी लड़कियां भी अच्छे पति की कामना के लिए यह व्रत रखती हैं।

मंगला गौरी व्रत का शुभ मुहूर्त

सावन मास के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को सूर्य मिथुन राशि में रहेगा। जबकि चद्रमा सुबह 11 बजकर 58 मिनट तक कुंभ राशि में रहेंगे, इसके बाद मीन राशि में गोचर करेंगे। ब्रम्हा मुहूर्त भोर में 4 बजकर 12 मिनट से 4 बजकर 52 मिनट तक चलेगा। अभिजीत मुहूर्त सुबह 11.59 बजे से लेकर 12.55 तक रहेगा। इसी अभिजात मुहूर्त में मां गौरी की पूजा करना शुभ होता है।

मंगला गौरी व्रत का शुभ योग

इस बार मंगला गौरी पर कई शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन सभी का भाग्य अच्छा करने वाला सौभाग्य और शोभन योग बन रहा है। इसके अलावा गुरु आदित्य योग, मालव्य राजयोग का भी निर्माण हो रहा है। गुरु के साथ चंद्रमा का नवम पंचम योग भी बन रहा है।

इन मंत्रों का करें जाप

"ॐ श्री गौरी शंकराय नमः"

"ॐ ह्रीं श्रीं क्लीं गौरी मंगला याय नमः"

मंगला गौरी व्रत की पूजन विधि

  • सुबह जल्दी उठकर नित्य कर्मों से निवृत्त होकर नए वस्त्र धारण करें।
  • मंगला गौरी अर्थात शिव पार्वती की एक फोटो या मूर्ति लें।
  • पूजा के लिए 16 सामग्री जैसे सुपारी, लौंग, इलायची और पान आदि रख लें।
  • व्रत का संकल्प लेकर पूजा पाठ करें।
  • इस व्रत में दिन में एक ही बार भोजन करना होता है रात में आप पूरे विधि विधान से व्रत का पारण करें और प्रसाद ग्रहण करें।

मंगला गौरी व्रत का महत्व

पुराणों में मंगला गौरी को माता पार्वती का रूप ही बताया गया है। मंगला गौरी के दिन व्रत रखने से दांपत्य जीवन में खुशहाली बनी रहती है।शादीशुदा महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र के लिए यह व्रत रखती है, तो वही कुंवारी लड़कियां अच्छे वर के लिए इस दिन उपवास रखती हैं।